नई दिल्ली । आंखों में जलन, खुजली, लालिमा, किरकिरापन, बार-बार पानी आना या ऐसा महसूस होना कि आंख में कोई बाहरी कण फंसा हुआ है, ड्राई आई यानी आंखों के सूखेपन के प्रमुख लक्षण माने जाते हैं। यह एक दीर्घकालिक समस्या है, जो व्यक्ति की कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार ड्राई आई रोग के सबसे कम पहचाने जाने वाले कारणों में से एक मीबोमियन ग्लैंड डिसफंक्शन है। पलकों के किनारों पर मौजूद मीबोमियन ग्रंथियां एक विशेष प्रकार का तेल बनाती हैं, जो आंसुओं की बाहरी परत का निर्माण करता है। यह तैलीय परत आंसुओं को जल्दी भाप बनकर उड़ने से रोकती है और आंखों को पर्याप्त नमी प्रदान करती है। जब ये ग्रंथियां बंद हो जाती हैं या सही ढंग से काम करना बंद कर देती हैं, तो आंसू तेजी से सूखने लगते हैं, जिससे आंखों में असहजता और जलन की समस्या बढ़ जाती है। चिंता की बात यह है कि इस समस्या से प्रभावित कई लोगों को लंबे समय तक पता ही नहीं चलता कि वे मीबोमियन ग्लैंड डिसफंक्शन से पीड़ित हैं।
उन्हें केवल आंखों में थकान, धुंधला दिखना या लगातार बेचैनी महसूस होती है। एयर कंडीशनर वाले कमरों या तेज हवा वाले वातावरण में ये लक्षण और अधिक गंभीर हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ड्राई आई की समस्या केवल आंखों तक सीमित नहीं होती, बल्कि कई बार यह शरीर में हो रहे अन्य बदलावों का संकेत भी हो सकती है। महिलाओं में, विशेष रूप से रजोनिवृत्ति के बाद, आंखों के सूखेपन की शिकायत अधिक देखी जाती है। इसका मुख्य कारण हार्मोनल बदलाव हैं, जो आंसुओं के उत्पादन और मीबोमियन ग्रंथियों की कार्यप्रणाली को प्रभावित करते हैं। हार्मोन के स्तर में परिवर्तन आंसुओं की स्वस्थ परत बनाए रखने वाले संतुलन को बिगाड़ सकता है। इसके अलावा मधुमेह से पीड़ित लोगों में भी ड्राई आई की समस्या अधिक देखने को मिलती है। कई बार आंखें सामान्य दिखाई देने के बावजूद लगातार सूखापन महसूस होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार मधुमेह और आंखों की सतह से जुड़ी बीमारियों के बीच गहरा संबंध पाया गया है। इसलिए मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए नियमित नेत्र परीक्षण कराना बेहद जरूरी माना जाता है। समय पर पहचान और उचित उपचार से आंखों के सूखेपन की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। मालूम हो कि आंखों में सूखापन आज के समय की एक आम समस्या बन चुकी है। अधिकांश लोग इसका कारण मोबाइल फोन, लैपटॉप और टेलीविजन जैसी डिजिटल स्क्रीन को मानते हैं। हालांकि नेत्र विशेषज्ञों का कहना है कि स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग इस समस्या का एक कारण जरूर है, लेकिन इसके पीछे कई अन्य महत्वपूर्ण वजहें भी हो सकती हैं।
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