विशेष संपादकीय
अशोक कुमार
18 जून को होने जा रहे राज्यसभा चुनाव को लेकर राज्य में महागठबंधन और एनडीए के बीच राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज है। दो सीटों के लिए होने जा रहे चुनाव को लेकर दो दिन पूर्व तक महागठबंधन में कांग्रेस और झामुमो के बीच काफी खींचतान चल रही थी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित झामुमो के सभी नेता इस बात को लेकर काफी नाराज थे कि कांग्रेस ने बिना उनसे विचार विमर्श किए अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी थी। झामुमो नेताओं की नाराजगी बिल्कुल स्वाभाविक थी। गठबंधन की सरकारों में कोई भी निर्णय आपसी सहमति से लिए जाने की स्वस्थ परंपरा रही है। इसी नाराजगी की वजह से झामुमो नेताअेां ने अपने अध्यक्ष मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में बैठक कर देानों सीटों पर उम्मीदवार देने का निर्णय ले लिया था। लेकिन कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद हेमंत सोरेन को बात माननी पड़ी ।
समझा जाता है कि राहुल गांधी ने हेमंत सोरेन को समझाया कि यदि हम एक सीट के लिए आपस में बटेंगे तो महागठबंधन को लेकर गलत संदेश जाएगा और भाजपा को विधायकों को तोडऩे और खरीद फरोख्त करने में मदद मिलेगी। हेमंत सोरेन ने राजनीतिक सूझबूझ का परिचय देते हुए कांग्रेसी नेताओं की बात को अंतत: मान लिया। महागठबंधन में दरार पड़ते-पड़ते हेमंत ने बचा लिया। हेमंत सोरेन ने एक और साहसिक और काबिले तारीफ निर्णय लेकर न केवल अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकताओं को बल्कि विपक्ष को भी चौंका दिया कि उन्होंने गुरुजी की इस सीट को पारिवारिक दबाव के बावजूद अपने परिवार के किसी सदस्य को उम्मीदवार नहीं बनाकर भाजपा से झामुमो में आए दलित नेता बैद्यनाथ राम को उम्मीदवार घोषित किया। जिस तरह नरेंद्र मोदी देश में और खासकर झारखंड में आदिवासी और पिछड़ा कार्ड खेल रहे हैं और झामुमो को वंशवाद की पार्टी बताकर खुले मंच से झामुमो की आलोचना करते रहे हैं उसी तर्ज पर हेमंत सोरेन ने दलित कार्ड खेलकर भाजपा को बता दिया कि हम पारिवारवाद वाली पार्टी नहीं हैं। हमारी पार्टी समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलती है।
हेमंत सोरेन ने एक तीर से दो शिकार किया है। एक तो भाजपा को यह संदेश दिया कि वह उनपर परिवारवाद और राज्यसभा चुनाव में थेैलीवाद का आरोप नहीं लगाए और दूसरा कांग्रेस को संदेश दिया कि वह दलितों की उपेक्षा न करे। पलामू प्रमंडल में दलितों की अच्छी खासी आबादी है और वहां झामुमो की स्थिति बहुत मजबूत नहीं है। उन्होंने बैद्यनाथ राम को उम्मीदवार बनाकर दलितों के बीच अपनीे साख बढ़ाने का काम किया है। लेकिन राज्यसभा चुनाव के मुतल्लिक एक बात की चर्चा करना काफी महत्वपूर्ण होगा कि झामुमो सुप्रीमो स्व शिबू सोरेन का विशेष ध्यान रखनेवाले और वर्षों से उनके साथ रहनेवाले पार्टी के केंद्रीय महासचिव विनादे पांडेय और दूसरे केंद्रीय महासचिव व प्रवक्ता और वर्षों से पार्टी की सेवा में समर्पित रहनेवाले सुप्रीयो भटटचार्य को यदि पार्टी राज्यसभा का उम्मीदवार बनाती तो पार्टी के सामान्य कार्यकताओं में इस विश्वास को बल मिलता कि पार्टी नेतृत्व आज न कल उन्हें भी समुचित पद और प्रतिष्ठा देगी।


