• संदर्भ – राज्यसभा चुनाव
चंदन मिश्र
झारखंड में राज्यसभा के पिछले कई चुनाव रोचक और दिलचस्प हुए हैं। किसी रहस्यमय फिल्म की तरह अपने अंदर रहस्य और रोमांच समेटे ये चुनाव अंतिम परिणाम आने तक रोचक बने रहे। इस बार भी झारखंड का राज्यसभा चुनाव कुछ ऐसा ही होने जा रहा है। दो सीटों के लिए होनेवाले चुनाव में अभी तक झामुमो और कांग्रेस ने अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। झामुमो ने पूर्व मंत्री बैजनाथ राम और कांग्रेस ने प्रणव झा को अपना उम्मीदवार बनाया है। भाजपा ने दावा किया है कि राज्यसभा चुनाव लड़ेगी। उसके संभावित उम्मीदवार गौरव बल्लभ ने नामांकन पत्र भी खरीद लिया है। हालांकि उनके नाम की अभी तक औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन इन सभी उम्मीदवारों से हटकर एक ऐसे शख्स पर सबकी नजर लगी हुई है, जिनके शनिवार को रांची पहुंचते ही राज्य की चुनावी सियासत पूरे उफान पर पहुंच चुकी है। यह नाम है झारखंड के पूर्व राज्यसभा सदस्य परिमल नाथवाणी का। परिमल नाथवाणी देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने से तालुक्कात रखते हैं। परिमल नाथवाणी ने भी राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र ले लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी उनकी मुलाकात हो चुकी है। लिहाजा इंडिया गठबंधन के दूसरे प्रमुख दल कांग्रेस के अंदर खलबली मची हुई है। कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को बतौर पार्टी ऑब्वर्जर बनाकर भेजा है। उन्होंने भी शनिवार की शाम को मुख्यमंत्री से मिलकर चुनाव के संबंध में बातचीत की और संतुष्ट होकर निकले।
झारखंड में जिन दो सीटों को लेकर चुनाव होने हैं, उनमें एक सीट झामुमो सांसद शिबू सोरेन के निधन से खाली हुई है। दूसरी सीट भाजपा के सांसद दीपक प्रकाश का कार्यकाल पूरा होने पर खाली होगी। दो सीटों के लिए होनेवाले राज्यसभा चुनाव को लेकर विधानसभा का वर्तमान अंकगणित देखें तो दोनों सीटें सत्तारूढ़ दलों के लिए जीत को मुफीद लगती हैं। लेकिन ऊपर से यह जितना सरल और स्पष्ट दिखाई देता है, दरहकीकत में ऐसा है नहीं। झामुमो बिहार और असम की विधानसभा चुनावों के बाद से कांग्रेस तथा राजद जैसे दलों की उपेक्षा से आहत है। बिहार में झामुमो को आग्रह के बावजूद एक भी सीट नहीं मिली थी। वही हाल असम चुनाव में भी झामुमो के साथ हुआ। कांग्रेस और राजद के रवैये से झामुमो का पूरा कुनबा नाराज है। राज्यसभा चुनाव आते ही कांग्रेस एक सीट के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सामने गिड़गिड़ाने लगी। पहले कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के राजू आए। तेलंगना के उपमुख्यमंत्री के साथ उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भेंट की। लेकिन कोई ठोस बात निकल कर नहीं आयी। इसी बीच कांग्रेस ने प्रणव झा को अपना उम्मीदवार बनाकर उनके नाम की घोषणा कर दी। कांग्रेस के इस कदम से झामुमो के मंत्री, विधायक खासे नाराज हो गये। सभी एक स्वर में कांग्रेस को कोई सीट न देने और न ही उसके उम्मीदवार को समर्थन देने की बात कह डाली।
झामुमो नेताओं से इस रवैये और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की चुप्पी से कांग्रेस नेतृत्व परेशान हो गया। फिर कांग्रेस ने चुनाव ऑब्वजर्वर बनाकर भेजा। अभी तक झामुमो के खेमे से खुलकर यह बात सामने नहीं आयी है कि दूसरी सीट पर झामुमो कांग्रेस के उम्मीदवार को समर्थन करेगा। लेकिन कांग्रेस नेता मुख्यमंत्री से मुलाकात कर मीडिया से कह रहे हैं कि दोनों सीट पर इंडिया गठबंधन का एक –एक उम्मीदवार जीतेगा।
पूर्व सांसद परिमल नाथवाणी ने झारखंड से राज्यसभा चुनाव लड़ने की इच्छा कुछ महीनों पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सामने जतायी थी। मुख्यमंत्री की पत्नी विधायक कल्पना सोरेन भी उनके साथ थीं। उस समय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें अपनी ओर से कोई ठोस वचन नहीं दिया था। लेकिन जिस ढंग परिमल नाथवाणी ऐन चुनाव के पहले रांची पहुंचकर चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं, निश्चित रूप से उनकी उपस्थिति से कांग्रेस सहित अन्य दलों में जबरदस्त हलचल मची है। परिमल नाथवाणी ने लगभग दो घंटे से ज्यादा वक्त मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पास बितायी।
इस राजनीतिक उथल-पुथल के बीद झारखंड के राज्यसभा चुनाव की तसवीर और गणित सोमवार को साफ हो जायेगा, जब उम्मीदवार अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। राज्यसभा चुनाव के लिए एक उम्मीदवार को कम से कम दस विधायकों (प्रस्तावकों) के हस्ताक्षर की जरूरत होती है। देखना दिलचस्प होगा कि किस किस उम्मीदवारों के दस दस प्रस्तावक मिलते हैं। सोमवार को राज्यसभा चुनाव के नामांकन की आखिरी तारीख है और उस दिन कितने उम्मीदवार नामांकन दाखिल करते हैं। कांग्रेस, झामुमो, भाजपा और निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में उतरे तो चुनावी मुकाबला दिलचस्प होगा। तब तक दम साधे राजनीतिक गतिविधियों पर नजर रखें।


