मुख्य सचिव की नीति के अनुरूप सभी कर्मियों का हो स्थानांतरण : मानस दास
दुमका। मुख्य सचिव झारखंड के निर्देश पर उपायुक्त कार्यालय दुमका द्वारा जारी किए गए लिपिक एवं टंकक कर्मियों के स्थानांतरण आदेश पर सवाल उठाते हुए आरटीआई कार्यकर्ता मानस दास ने उपायुक्त दुमका से उक्त आदेश को रद्द करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि स्थानांतरण प्रक्रिया में समानता और पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया। मानस दास ने कहा कि समाहरणालय में कुल 168 कर्मी पदस्थापित हैं, लेकिन उनमें से केवल करीब 20 कर्मियों का ही स्थानांतरण किया गया है। उन्होंने दावा किया कि जिन कर्मियों का स्थानांतरण किया गया है, उनमें कई जल्द ही सेवानिवृत्त होने वाले हैं, जबकि कुछ का स्थानांतरण कुछ वर्ष पूर्व ही किया जा चुका है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दूसरी ओर ऐसे कई कर्मी हैं जो पिछले 10 से 30 वर्षों से एक ही कार्यालय में जमे हुए हैं, लेकिन उनका अब तक स्थानांतरण नहीं किया गया। मानस दास ने कहा कि मुख्य सचिव झारखंड की स्थानांतरण नीति में स्पष्ट निर्देश है कि तीन वर्ष या उससे अधिक समय से एक ही कार्यालय में कार्यरत कर्मियों एवं अधिकारियों का स्थानांतरण किया जाना चाहिए। आरटीआई कार्यकर्ता ने उपायुक्त से मांग की है कि वर्तमान स्थानांतरण आदेश को रद्द करते हुए सभी कर्मियों के लिए समान एवं पारदर्शी मापदंड अपनाकर नए सिरे से स्थानांतरण आदेश जारी किया जाए, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था में निष्पक्षता बनी रहे।
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दशकों से जिला मुख्यालय में जमे कर्मियों का नहीं हुआ तबादला
दुमका। गौतम कुमार लिपिक जिला स्थापना शाखा योगदान की तिथि 14/02/1996, रमिनी झा लिपिक जिला स्थापना शाखा योगदान की तिथि 18/12/2001 इन दोनों का स्थानांतरण कभी भी प्रखंड मुख्यालय में नहीं हुआ, योगदान के समय से ही जिला मुख्यालय में बने हैं। प्रणीत कुमार, शशि बिंदु साह, अभिषेक कुमार शुक्ला, प्रदीप दास, आनंद हांसदा, अजीत बास्की सभी वर्ष 2004 से, बिनीता कुमारी 1992 से, राजेश सहाय 1993 से, चांद मुनि 2007 से, ईशा गुप्ता 2009 से, जया भारती एवं चेतना दास 2018 से, परमिता सोरेन 2019 से एक स्थान पर पदस्थापित है लेकिन इनलोगों का स्थानांतरण नहीं हुआ। इसी प्रकार सरैयाहाट अंचल कार्यालय में आनंद भारद्वाज और लूसी चौबे वर्षों से पदस्थापित है। साथ ही कई प्रखंड और अंचल कार्यालय में भी वर्षों से जमे लिपिकों का स्थानांतरण नहीं हुआ है।


