बाबूलाल मरांडी का विपक्ष पर तीखा हमला, कहा- आदिवासी समाज की एकजुटता को नहीं तोड़ पाएंगे विरोधी
दुमका में नेता प्रतिपक्ष ने राजनीतिक लाभ के लिए फूट डालने की कोशिशों को बताया नाकाम
ब्यूरो
दुमका। सूबे के प्रथम मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी दुमका परिसदन में पत्रकारों से वार्ता के क्रम में विपक्ष पर जोरदार राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि राजनीतिक लाभ लेने के लिए कुछ ताकतें आदिवासी समाज को बांटने और उन्हें अलग-थलग करने की कोशिश कर रही हैं। मरांडी ने चेतावनी देते हुए कहा कि विरोधियों की ऐसी हर साजिश विफल होगी, क्योंकि आदिवासी समाज अपने अधिकारों और एकजुटता को लेकर पूरी तरह सजग है। मरांडी ने जनसंख्या असंतुलन पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि आजादी के बाद संताल परगना में मुसलमानों की संख्या 7 गुना बढ़ी है। इसके मद्देनजर अब क्षेत्र में एनआरसी लागू करने की सख्त जरूरत है और केंद्र सरकार को इस पर तुरंत पहल करनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि साल 2003 के बाद जितने भी लोग बाहर से यहां आए हैं, वे सभी एनआरसी लागू होने पर पकड़े जाएंगे। इससे यह साफ हो जाएगा कि आजाद भारत में ये लोग आखिर कहां से आए हैं।
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सनातन की मूल भावना से जुड़ा है आदिवासी समाज, विभाजन की हर कोशिश होगी पूरी तरह विफल
विपक्ष की रणनीतियों को आड़े हाथों लेते हुए बाबूलाल मरांडी ने स्पष्ट किया कि जो लोग आदिवासी समाज में दरार पैदा करने की बातें कर रहे हैं, वे असल में सनातन की मूल भावना से पूरी तरह अनजान हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज आंतरिक रूप से बेहद मजबूत और एकजुट है। समाज को खंडित करने का सपना देखने वाले नेताओं को जमीन पर मुंह की खानी पड़ेगी, क्योंकि यहां का पारंपरिक ताना-बाना किसी भी राजनीतिक स्वार्थ से कहीं ज्यादा मजबूत है।
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धार्मिक ग्रंथों के उदाहरण से समझाया ताना-बाना, विविधताओं से भरा है आदिवासियों का ताना-बाना
बाबूलाल मरांडी ने धार्मिक ग्रंथों का गहरा उदाहरण पेश किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह सनातन परंपरा में कोई एक विशिष्ट ग्रंथ अनिवार्य नहीं है, ठीक उसी तरह आदिवासी समाज का भी कोई एक विशेष ग्रंथ या मत नहीं है। उन्होंने इस्लाम में कुरान और ईसाई धर्म में बाइबिल जैसे विशिष्ट ग्रंथों का जिक्र करते हुए समझाया कि आदिवासी समाज इन सबसे अलग अपनी विविधताओं और स्वतंत्र विचारों के लिए जाना जाता है, जिसे किसी एक दायरे में नहीं बांधा जा सकता।
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आदिवासी समाज अपनी पहचान चुनने को स्वतंत्र, राजनीतिक साजिशें कभी नहीं होंगी सफल
नेता प्रतिपक्ष ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आदिवासी समाज अपनी पहचान, परंपरा और पसंद के अनुसार कुछ भी लिखने या अपनी राह चुनने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है। उन्होंने कहा कि समाज पर किसी भी तरह का बाहरी एजेंडा थोपने की कोशिश कामयाब नहीं होगी। उनके सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने के लिए रची जा रही तमाम राजनीतिक साजिशों का अंत असफलता के साथ होगा, क्योंकि समाज अपनी विशिष्ट पहचान की रक्षा करना अच्छे से जानता है।
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दुमका की धरती से मरांडी का बड़ा राजनीतिक संदेश, समाज को अलग-थलग करने का आरोप
दुमका में दिए गए बाबूलाल मरांडी के इस बयान को राज्य की राजनीति में एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने विरोधियों पर समाज को बांटकर राजनीतिक रोटियां सेकने का सीधा आरोप मढ़ा है। इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर मरांडी का यह आक्रामक रुख बताता है कि आने वाले दिनों में आदिवासी अस्मिता और एकजुटता का मुद्दा सूबे की राजनीति के केंद्र में रहने वाला है, जहां विपक्ष को हर मोर्चे पर कड़ी चुनौती मिलेगी।


