नई दिल्ली । भारत की मजबूत होती अर्थव्यवस्था के सामने आगामी महीनों में कई बड़ी चुनौतियां खड़ी होती नजर आ रही हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और इस साल कमजोर मानसून की आशंका ने आर्थिक विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है। हालिया चर्चाओं और रिपोर्टों के संकेतों के अनुसार, यदि ऊर्जा आपूर्ति में बाधाएं लंबे समय तक बनी रहती हैं और मानसून सामान्य से कम रहता है, तो इसका सीधा असर देश की आर्थिक विकास दर (ग्रोथ) और आम आदमी की जेब पर पड़ना तय है।
वर्तमान में भारतीय आर्थिक गतिविधियों में नरमी के स्पष्ट संकेत मिलने लगे हैं। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के पीएमआई, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक और कोर सेक्टर जैसे महत्वपूर्ण आंकड़ों में गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही एल-नीनो के प्रभाव के कारण मानसून के सामान्य से कम रहने की चेतावनी ने ग्रामीण मांग और कृषि क्षेत्र पर संकट के बादल और गहरे कर दिए हैं। यदि खेती प्रभावित होती है, तो खाद्य महंगाई को नियंत्रित करना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगा। ऊर्जा के मोर्चे पर स्थिति और भी संवेदनशील है। हालांकि अधिकारियों का मानना है कि फिलहाल तेल की आपूर्ति में कोई बड़ी रुकावट नहीं है, लेकिन पश्चिम एशिया के बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान और उत्पादन में कटौती से कच्चे तेल की कीमतें उच्च स्तर पर बनी रह सकती हैं। अनुमानों के मुताबिक, साल 2026 में ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में सरकार के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखना मुश्किल होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कटौती करती है, तो उसे भारी राजस्व घाटा होगा। हालांकि सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए एक लाख करोड़ रुपये का इकोनॉमिक स्टेबलाइजेशन फंड बनाया है, लेकिन कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक रहने वाली तेजी का बोझ अंततः ग्राहकों और तेल कंपनियों पर भी पड़ सकता है।
भारतीय रिजर्व बैंक के अनुमानों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में प्रत्येक 10 फीसदी की बढ़ोतरी महंगाई को लगभग 0.5 फीसदी तक बढ़ा सकती है। इससे न केवल लोगों की क्रय शक्ति कम होगी, बल्कि देश की कुल जीडीपी ग्रोथ पर भी दबाव बढ़ेगा। आने वाले महीने भारतीय अर्थव्यवस्था के लचीलेपन की वास्तविक परीक्षा लेंगे, जहां सरकार को वैश्विक अस्थिरता और घरेलू जलवायु चुनौतियों के बीच संतुलन बनाना होगा।
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