– झामुमो की भी है कांग्रेस पर नजदीकी नजर
– गठबंधन की राजनीति पर पड़ सकता है असर
राज्य और राजनीति
चंदन मिश्र
झारखंड में सत्तारूढ़ दलों के अंदर सबकुछ अच्छा नहीं चल रहा है। सूबे में इंडिया गठबंधन की सरकार है, जिसके मुख्य घटक झामुमो और कांग्रेस हैं। लेकिन गठबंधन में शामिल दोनों प्रमुख दलों के बीच तल्खियां बढ़ती जा रही है। कांग्रेस संगठन के अंदर सांगठनिक ढांचे को लेकर उभरा असंतोष और विरोध के स्वर अच्छे संकेत नहीं कर रहे हैं। कांग्रेस की अंदरूनी उथल-पुथल ने यह साफ कर दिया है कि पार्टी के भीतर सत्ता, संगठन और सम्मान की लड़ाई अभी थमी नहीं है और इसका असर झारखंड की गठबंधन राजनीति पर आगे और स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।
असम में झामुमो के अलग से लड़ने से कांग्रेस को पहले से ही बौखलाहट थी, परिणाम में करारी हार ने इस बौखलाहट को और बढ़ा दिया है। पश्चिम बंगाल में भी झामुमो ने कांग्रेस को चिढ़ाने के लहजे में उसका साथ न देकर टीएमसी के पक्ष में चुनाव प्रचार किया। इससे भी कांग्रेस में खासी नाराजगी रही। इधर झारखंड कांग्रेस की प्रदेश कमेटी का विस्तार किया गया। जम्बो जेट कमेटी के गठन की घोषणा होते ही पार्टी के अंदर बवाल मच गया। झारखंड में कांग्रेस पार्टी वर्तमान में गंभीर आंतरिक कलह और अंर्तद्वंद्व से जूझ रही है, जिसका सीधा असर संगठन और सरकार में उसकी स्थिति पर पड़ रहा है। मई के पहले सप्ताह में झारखंड कांग्रेस की 314 सदस्यीय नई राज्य समिति के गठन के बाद असंतोष और गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है।
नई राज्य कांग्रेस कमेटी में 314 सदस्यों को शामिल करने (जंबो-जेट कमेटी) के बाद वरिष्ठ नेताओं ने भारी असंतोष जताया है। वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि अनुभवी और समर्पित कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया गया है। असंतोष के बीच प्रदेश कांग्रेस सचिव प्रशांत किशोर ने इस्तीफा दे दिया है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता सुरेंद्र सिंह ने भी इस्तीफा दे दिया। पार्टी के पुराने नेता और नई कमेटी में सचिव बनाए गए जगदीश साहु भी अपनी उपेक्षा से खासे नाराज हैं। उनका कहना है कि तीस साल पहले बनी कमेटी में भी वह सचिव बनाए गए थे, और आज भी सचिव बनाए गए हैं। जबकि उनसे कई जूनियर नेताओं को महासचिव और उपाध्यक्ष बना दिया गया है। नई कमेटी की घोषणा के बाद सबसे अधिक नाराजगी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सरकार के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर खासे नाराज है। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है वित्त मंत्री ने भी इस नई व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। इस कलह का असर सत्ताधारी गठबंधन (झामुमो-कांग्रेस) पर भी पड़ रहा है, क्योंकि अपनी ही पार्टी के भीतर लड़ाई के कारण कांग्रेस सरकार में अपनी बात मजबूती से नहीं रख पा रही है। आने वाले राज्यसभा चुनावों को लेकर भी कांग्रेस के भीतर बेचैनी बढ़ी है, और पार्टी एक सीट पर दावा कर रही है। आंतरिक संघर्ष के कारण पार्टी का ध्यान सांगठनिक मजबूती से हटकर गुटीय समीकरणों पर केंद्रित हो गया है। पार्टी के भीतर ही झारखंड प्रदेश प्रभारी के. राजू के निर्णयों पर असहमति जताई जा रही है। पार्टी के अंदर वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा और कथित रूप से अनुशासनहीनता करने वालों को महत्व देने के आरोप लग रहे हैं, जिससे कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति है।
वरीयता का मान नहीं
विभिन्न प्रकार की कमेटियों के गठन में झारखंड कांग्रेस में अंदर ही अंदर कुछ सीनियर नेताओं को अपमानित करने का खेल चला है। यही कारण है कि इस्तीफा देने का सिलसिला रुक नहीं रहा है। दोबारा सचिव बनाए गए जगदीश साहू ने अपना इस्तीफा अध्यक्ष को भेज दिया है। लगातार तीन टर्म सचिव बनाए जाने से नाराज होकर उन्होंने अपमानित करते हुए आरोप लगाते हुए इस्तीफा भेजा है। दरअसल नई इस प्रक्रिया में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय समेत तमाम सीनियर्स का नाम नीचे चला गया है। इसी प्रकार पार्टी की ओर से जारी उपाध्यक्षों की सूची में सांसद कालीचरण मुंडा का नाम सूची में नीचे है तो विधायक कुमार जयमंगल, नमन विक्सल कोंगाड़ी, राजेश कच्छप, सुरेश बैठा आदि का नाम सातवें नंबर से लेकर 16वें नंबर तक है। टीम में कई नेता अपमानित महसूस कर रहे हैं। इसका कारण बना है प्रदेश कमेटी में वर्णानुक्रम तरीके से नाम प्रकाशित करना।
दूसरी ओर, इस सूची में सबसे ऊपर अभिलाष साहू का नाम है। यह विवाद नहीं उठता अगर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी का नाम भी इसी फार्मूले से सूची में दर्ज होती। राजनीतिक मामलों की कमेटी में सबसे पहला नाम प्रदेश प्रभारी के. राजू का है, जबकि वर्णानुक्रम सिस्टम में उनका नाम नीचे होना चाहिए था। दूसरा नाम केशव महतो कमलेश का तो तीसरे में आलमगीर आलम हैं। इसी सूची में विधायक दल के नेता प्रदीप यादव का नाम बहुत नीचे 21वें नंबर पर है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार और डा.रामेश्वर उरांव का नाम नीचे है। आश्चर्यजनक रूप से अजय कुमार के बाद रामेश्वर उरांव का नाम दर्ज कर दिया गया है।
झारखंड कांग्रेस में ‘डैमेज कंट्रोल’ की कोशिश
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के सांगठनिक निर्णयों से नाराज चल रहे वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर को मनाने की कवायद भी शुरू हो गई। कांग्रेस के पूर्व सांसद धीरज साहू तथा झारखंड सरकार के मंत्री और कांग्रेस नेता इरफान अंसारी उनके आवास पर पर पहुंचकर उन्हें मनाने और समझाने की कोशिश की। इस दौरान तीनों नेताओं के बीच पार्टी संगठन, वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों तथा विभिन्न सामाजिक एवं संगठनात्मक विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। बातचीत के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि वे पार्टी के कुछ निर्णयों से आहत अवश्य हैं, लेकिन पार्टी हित को सर्वोपरि मानते हुए 18 मई 26 तक कोई सार्वजनिक बयान नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि वे झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू से मुलाकात कर अपनी बात विस्तारपूर्वक रखेंगे।
पार्टी विरोधी बातें नहीं कही- मंत्री राधाकृष्ण किशोर
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि उन्होंने जो बातें कही हैं, वे पार्टी विरोधी नहीं, बल्कि पार्टी हित, सामाजिक न्याय और सम्मान से जुड़ी बातें हैं। उन्होंने पार्टी के दोनों नेताओं को आश्वस्त किया कि 18 मई तक वे संयम बनाए रखेंगे और अपनी बात पार्टी आलाकमान के समक्ष रखेंगे।
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