चेन्नई । तमिलनाडु की राजनीति में आए बड़े बदलाव के बीच सुपरस्टार थलापति विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के लिए नई कानूनी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। एक ओर जहां विजय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की ओर कदम बढ़ा रहे हैं और हाल ही में उन्होंने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया है, वहीं दूसरी ओर मद्रास हाईकोर्ट में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर एक रिट याचिका दायर की गई है।
यह याचिका चेन्नई निवासी एम. राजकुमार द्वारा दाखिल की गई है, जिसमें अभिनेता विजय पर साल 2015 के दौरान अपनी वास्तविक आय और वित्तीय लेन-देन छिपाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यह विवाद मुख्य रूप से उनकी फिल्म पुली की रिलीज के समय का है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि आयकर विभाग विजय के खिलाफ आधिकारिक अभियोजन शुरू करे और कानून प्रवर्तन एजेंसियां इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करें। साथ ही, यह भी अनुरोध किया गया है कि आयकर विभाग जब्त की गई सामग्रियों को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को सौंपे ताकि मनी लॉन्ड्रिंग के संभावित पहलुओं की जांच की जा सके।
मद्रास हाईकोर्ट की रजिस्ट्री ने बुधवार को इस रिट याचिका को नंबर दे दिया है और जल्द ही इस पर सुनवाई होने की संभावना है। इससे पहले, मुख्य न्यायाधीश सुष्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने 8 अप्रैल को रजिस्ट्री को इस याचिका को स्वीकार करने के निर्देश दिए थे। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सत्ता संभालने की तैयारियों के बीच विजय के खिलाफ इन पुराने मामलों का फिर से उभरना उनके भविष्य के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल, सभी की निगाहें हाईकोर्ट के अगले रुख पर टिकी हैं। मामले की जड़ें 30 सितंबर 2015 को आयकर विभाग द्वारा विजय के आवास और कार्यालयों पर की गई छापेमारी से जुड़ी हैं। विभाग को तलाशी के दौरान ऐसे दस्तावेज मिले थे जिनसे संकेत मिला कि पुली के निर्माताओं ने विजय को चेक के माध्यम से दी गई फीस के अलावा 4.93 करोड़ रुपये नकद दिए थे। उस समय मेकर्स ने केवल चेक की राशि पर टीडीएस जमा किया था। पूछताछ के दौरान विजय ने कथित तौर पर 5 करोड़ रुपये नकद लेने की बात स्वीकार की थी और उस पर टैक्स देने की सहमति जताई थी। विवादों को सुलझाने के लिए विजय ने वित्तीय वर्ष 2015-16 के लिए 15 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय घोषित की थी। हालांकि, बाद में जब उन्होंने अपनी आय का रिटर्न दाखिल किया, तो उन्होंने फैंस क्लब के खर्चों और संपत्तियों के अवमूल्यन पर छूट की मांग की। आयकर विभाग ने इन दावों को खारिज करते हुए उन पर जुर्माना लगा दिया था।


