अशोक कुमार
4 मई 2026 को पांच राज्यों में हुए विधानसभा के चुनाव रिजल्ट में पं बंगाल और तमिलनाडू के परिणाम ने चौकाने का काम किया है। आजादी के बाद बंगाल मे बीजेपी को पहली बार सरकार बनाने के लिए बहुमत मिलना और तमिलनाडू में डीएमके और एडीएमके का किला ढहना किसी चमत् कार से कम नहीं कहा जा सकता है। बंगाल में पन्द्रह वर्षो से एकछत्र राज्य चलानेवाली ममता बनर्जी ने जिस तरह वामपंथी सीपीएम का किला ढाहकर सत्ता पर काबिज हुई थी उसी प्रकार आज बीजेपी ममता बनर्जी के डेढ़ दशक पुरानी किला को ढाह कर आज सत्ता पर कााबिज हो रही है।
जनसंघ के संस्थापक श्यामाप्रसाद मुखर्जी की धरती पर बीजेपी का सत्ता में आना एक एतिहासिक घटना मानी जाएगी। बीजेपी पिछले डेढ़ दशक से बंगाल में अपनी कमजोर संगठन को मजबूत करने में लगी थी। के विधानसभा चुनाव में सारी शक्ति लगाने के बाबजूद 77 सीटें जीत कर विपक्ष की भूमिका में आयी थी। इस बार प्रधानमंत्री और ग्रह मंत्री समेत सभी बड़े नेता चुनाव कमान संभाले हुए थे। भाजपा नेताओं की रणनीति के सामने टीएमसी के ममत बनर्जी की रणनीति धराशयी हो गयी। इस चुनाव में भाजपा का हिन्दू कार्ड हिन्दू मतदाताओं को एकजूट करने में पूरी तरह से कामयाब रहा। ममता बनर्जी की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति और राज्य में गुंडागर्दी के बढ्रते प्रभाव से आम मतदाता राज्य में परिवर्तन चाह रहे थे। आधी आबादी यानी महिलाओं ने भी इस बार ममता बनर्जी का साथ नहीं दिया क्यों कि महिलाएं असुरिक्षत महसूस कर रही थी। इस बार ममता बनर्जी की पार्टी केकार्यकर्ताओं की बूथों पर गुंडागर्दी भी नहीं चली क्यों कि अधिकांश उनके प्रभावक्षेत्र वाले बूथों पर केेंद्रीय र्फोर्स को तैनात कर दिया गया था। अब बंगाल में भाजपा के नेतृत्ववाली नयी सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती पूरे बगंाल में सुशासन कायम कर सभी वर्ग के लेागों को संतुष्ठ करना होगा। मुसलमानों को भी विश्वास में लेना होगा।
बंगाल में वर्षों से कायम भय और भ्रष्टाचार को दूर करना होगा। उधर दक्षिण के राज्य तमिलनाडू में एक लोकप्रिय फिल्म अभिनेता विजय ने नयी पार्टी बनाकर वर्षो से सत्तारूढ़ डीएमके ओैर अन्नाडीएमके की जड़ें हिलाकर रख दिया। वहां की जनता भी परिवर्तन चाह रही थी। मेंै पिछले साल मद्रास और वेलौर में था। वहां की जनता को उस समय भी विजय की लोकप्रियता का गुणगान करते मैंने देखा सुना था। आम गरीब मतदाताओं के बीच वे लोकप्रिय हैं। उनकी फिल्मों में भी आम जनता के दुख दर्द का चित्रण देखने को मिलता है। वहां की युवा पीढ़ी उनका दिवाना है। इसका लाभ उन्हेंं चुनाव में मिला। विजय ने महज दो साल पहले टीवीके नामक पार्टी की स्थापना की थी और े भ्रष्टाचार और परिवारवाद के विरोध में अभियान चलाया जिसका जनमानस ने समर्थन किया। लेकिन विजय की पार्टी को सौ से अधिक सीटें मिलेगी , इसकी उ ाीद वहां भी पहले से किसी को नहीं थी। आनेवाले दिनों में उनकी पार्टी एक प्रमुख राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरेगी, ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही है। उनकी पार्टी की चुनावी रणनीति बनाने में प्रशांत किशोर का अहम योगदान रहा है। उनकी पार्टी डीएमके और एआईडीएमके की तरह उत्तर भारत और हिंदी विरोधी नहीं है। तमिलनाढू की राजनीति विजय का राजनीतिक और सामाजिक कद रजनीकांत और कमल हासन से कम नहीं आंका जा सकता है।


