मुंबई । बॉम्बे हाई कोर्ट ने टैक्स से जुड़े मामलों में अलग-अलग उच्च न्यायालयों में हो रही अलग-अलग व्याख्याओं पर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से एक समान नीति (यूनिफार्म पॉलिसी) बनाने की जरूरत बताई है। अदालत ने कहा कि इससे “न्यायिक अराजकता” को रोका जा सकेगा। न्यायाधीश गिरीश कुलकर्णी और न्यायाधीश आरती साठे की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए चीनी (शुगर) निर्यातकों को 2021 की निर्यात उत्पादों पर शुल्कों और करों की छूट (RoDTEP) योजना के तहत रिफंड और लाभ देने का आदेश दिया। अदालत ने 1953 के एक ऐतिहासिक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एम. सी. छागला ने भी केंद्रीय कानूनों की व्याख्या में एकरूपता की जरूरत बताई थी।
कोर्ट ने कहा कि आज के समय में, जब एक ही मुद्दे पर अलग-अलग हाईकोर्ट में कई मामले लंबित हैं, यह सिद्धांत और भी महत्वपूर्ण हो गया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि कई बार आयकर विभाग अलग-अलग हाईकोर्ट में अलग-अलग रुख अपनाता है, जिससे विरोधाभासी फैसले आते हैं और स्थिति और जटिल हो जाती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब किसी मुद्दे पर एक हाईकोर्ट का अंतिम निर्णय आ चुका हो, तो उसी मुद्दे को अन्य हाईकोर्ट में बार-बार नहीं उठाया जाना चाहिए।
क्या था मामला?
चार शुगर निर्यातकों ने 2024 में याचिका दायर कर कस्टम विभाग द्वारा RoDTEP योजना के तहत रिफंड और एक्सपोर्ट रिबेट देने से इनकार को चुनौती दी थी। केंद्र सरकार ने 2022 की अधिसूचना के आधार पर इस पर रोक लगाई थी। निर्यातकों का आरोप था कि उन्हें “मनमाने तरीके से” योजना के लाभ से वंचित किया गया। वहीं, केंद्र की ओर से कहा गया कि सितंबर 2021 में ही चीनी को ड्यूटी क्रेडिट के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था। हालांकि, अदालत ने पाया कि बाद में जारी अधिसूचना के तहत डायरेक्टरेट ऑफ शुगर की अनुमति से सीमित मात्रा में निर्यात की इजाजत दी गई थी।
ऐसे में, यदि निर्यात नियमों के तहत किया गया है, तो योजना के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी माना कि गुजरात हाई कोर्ट पहले ही इस मुद्दे पर फैसला दे चुका है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी चुनौती खारिज कर अंतिम रूप दे दिया है। अंत में बॉम्बे हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि संबंधित कंपनियां अपने किए गए शुगर निर्यात पर रिबेट और अन्य लाभ पाने की हकदार हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह “नेशनल लिटिगेशन पॉलिसी” के तहत ऐसी एक समान नीति बनाए, जिससे देशभर में टैक्स मामलों में एकरूपता बनी रहे और अनावश्यक विवादों से बचा जा सके।


