नई दिल्ली । कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने शनिवार को कहा कि कल लोकसभा में जो हुआ वो लोकतंत्र की बहुत बड़ी जीत है। सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण के जरिए सत्ता में बने रहने की साजिश कर रही थी। उन्होंने कहा कि मैं बहुत खुश हूं कि लोकसभा में सीटें बढ़ाने के लिए लाया गया बिल गिर गया। सत्ता पक्ष हमें महिला विरोधी कहकर मसीहा नहीं बन सकता। उन्होंने इस विधेयक को लोकतंत्र के लिए साजिश बताया, जिसका मकसद संघीय ढांचे को कमजोर करना और सत्ता में बने रहना था। गांधी के अनुसार, इस सत्र को अचानक बुलाना और मसौदे को जल्दबाजी में सार्वजनिक करना सरकार की मंशा पर सवाल उठाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बिल वास्तव में महिलाओं के नाम पर परसीमन कराने का एक जरिया था, ताकि 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का निर्धारण हो और जाति जनगणना के आंकड़ों को नजरअंदाज किया जा सके।
प्रियंका गाधी ने कहा कि कल लोकतंत्र की एक बड़ी जीत हुई है। मोदी सरकार ने लोकतंत्र को कमजोर करने और संघीय ढांचे को बदलने की साजिश की थी, जिसे हमने हरा दिया। उन्होंने कहा कि ये संविधान की जीत है, देश की जीत है, विपक्ष की एकता की जीत है- जो सत्ता पक्ष के नेताओं के चेहरे पर साफ दिख रही थी। उन्होंने कहा किगृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने-अपने भाषणों में कहा कि अगर विपक्ष इस मुद्दे पर सहमत नहीं होगा तो न कभी चुनाव जीत पाएगा, न ही सत्ता में आ पाएगा। उन्होंने कहा कि इन बातों से ही साफ़ हो गया कि सरकार की मंशा क्या थी। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि सरकार द्वारा जो साजिश रची गई, उसका उद्देश्य सत्ता हासिल करना है। इसके लिए सरकार ने सत्ता के लिए महिलाओं का इस्तेमाल किया। कांग्रेस ने भाजपा की मंशा पर उठाए सवाल सांसद ने कहा कि सरकार चाहती थी कि महिला आरक्षण के नाम पर विपक्ष यह बिल पारित करवा दे, ताकि उन्हें मनमाने तरीके से परिसीमन की आजादी मिल जाए, जिससे मोदी सरकार को जातिगत जनगणना का सहारा न लेना पड़े।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का मानना था कि अगर बिल पारित होगा तो उनकी जीत होगी और बिल पारित नहीं हुआ तो विपक्ष को महिला विरोधी बता देंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा ऐसा कर खुद को महिलाओं का मसीहा साबित करना चाहती थी। महिलाओं का मसीहा बनना चाहती है भाजपा इसके आगे उन्होंने कहा कि भाजपा का महिलाओं के संदर्भ में एक इतिहास है। ये इतिहास बहुत स्पष्ट है। सिर्फ सदन में विपरीत कहने से इस पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि देश की महिलाओं ने उन्नाव को देखा, हाथरस को देखा, महिला खिलाडिय़ों को देखा, मणिपुर की महिलाओं को देखा। मोदी सरकार ने कभी उनकी सुध नहीं ली और आज संसद में ‘महिलाओं का मसीहा’ बनना चाहती है। सांसद ने कहा कि ये महिला आरक्षण बिल की बात नहीं थी, यह बात परिसीमन से जुड़ी हुई थी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार को परिसीमन इस आधार पर करना था, जिसमें उसे जातिगत जनगणना के आंकड़ों को देखने की जरूरत नहीं होती और मनमानी करने की पूरी आजादी होती। उन्होंने कहा कि ऐसे में मुमकिन ही नहीं था कि विपक्ष मोदी सरकार का साथ दे। उन्होंने कहा कि पूरे देश ने देख लिया है कि जब विपक्ष एकजुट होता है तो कैसे मोदी सरकार को हराया जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार के लिए ये काला दिन इसलिए क्योंकि इनको धक्का लगा। विपक्ष ने सरकार की साजिश को नाकाम किया।


