दुमका। वित्तीय अनुशासन को लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। मुख्य सचिव, झारखंड के निर्देशों के बाद उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने जिला मुख्यालय में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। इस बैठक का मुख्य एजेंडा राज्य के विभिन्न जिला कोषागारों से अवैध निकासी की प्राप्त सूचनाओं पर अंकुश लगाना और जिले की वित्तीय व्यवस्था को चाक-चौबंद करना था।
उपायुक्त ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जिले में एक विशेष जांच टीम गठित करने का निर्णय लिया है। यह टीम जिले के विभिन्न सरकारी कार्यालयों का औचक निरीक्षण करेगी और वित्तीय लेन-देन से जुड़े सभी अभिलेखों की बारीकी से जांच करेगी।
उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि जिले में आहरण और व्यय की हर प्रक्रिया कोषागार के तय मानकों और दिशा-निर्देशों के तहत ही होनी चाहिए। प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करते हुए उपायुक्त ने चेतावनी दी है कि आहरण एवं संवितरण अधिकारियों की भूमिका इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण है। यदि किसी भी स्तर पर वित्तीय लापरवाही या अनियमितता उजागर होती है, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इस बैठक में अपर समाहर्ता और जिला कोषागार पदाधिकारी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे, जिन्हें पारदर्शी कार्यप्रणाली बनाए रखने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।


