चर्चा के दौरान कांग्रेस ने कहा:सरकार महिला आरक्षण रोकने के लिए लाई है परिसीमन बिल
पीएम मोदी बोल-नियत में खोट वालों को नारी शक्ति माफ नहीं करेगी
सत्तापक्ष और विपक्ष में अविश्वास, लटक सकते है तीनों बिल!
लोकसभा में बहुमत का आंकड़ा 360, वहीं राज्यसभा में जादुई आंकड़ा 163 है
लोकसभा में सत्ताधारी दल के पास 293 सदस्य तो राज्यसभा में 142 सदस्य हैं
नई दिल्ली । संसद के विशेष सत्र के दौरान केंद्र सरकार ने गुरुवार को लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े तीन संशोधन बिल पेश किए। परिसीमन विधेयक को छोडक़र अन्य दो विधेयक संविधान संशोधन विधेयक हैं। पहला बदलाव संवैधानिक संशोधन है, इसके तहत संसद में सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 तक की जाएगी। साथ ही एक विधेयक पेश हुआ, जिसके जरिए एक परिसीमन आयोग का गठन होगा ताकि नए संसदीय निर्वाचन क्षेत्र बनाए जा सके। केंद्र सरकार ने परिसीमन प्रक्रिया को एक-दूसरे अहम बदलाव से जोड़ दिया है- महिलाओं के लिए आरक्षण अधिनियम का कार्यान्वयन, जिसका उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करना है। महिला आरक्षण अधिनियम 2023 या कहें नारी शक्ति वंदन अधिनियम को संवैधानिक संशोधन के माध्यम से पारित किया गया था, लेकिन इसे तब तक के लिए स्थगित रखा गया था जब तक कि लंबे समय से लंबित परिसीमन प्रक्रिया के जरिए लोकसभा और विधानसभाओं में सीटों की संख्या नहीं बढ़ा दी जाती। लेकिन सरकार जिस तरह इन बिलों को संसद में लाई है उसको लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच अविश्वास की खाई गहरा गई है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि तीनों बिल संसद में लटक सकते हैं।
विपक्ष ने बिल पर चर्चा के दौरान सरकार की नियत पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि साल 2023 में ही महिलाओं के लिए रिजर्वेशन संविधान का हिस्सा बन चुका था। अब बस इसे चुनावों में लागू करना बाकी था। इस प्रक्रिया को परिसीमन के काम से जोड़ा गया था, जो 2027 के बाद ही मुमकिन लग रहा था। पर अब केंद्र ने संविधान के उस प्रावधान में संशोधन करके परिसीमन की प्रक्रिया को तेज करने का फैसला किया है। जिसका पूरा विपक्ष विरोध कर रहा है। इन्हें पारित करने के लिए संसद में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। विपक्ष का वॉकआउट बहुमत के आंकड़े को कम कर सकता है। लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 360 है। सत्ताधारी दल के पास 293 सदस्य हैं, यानी उसे अभी भी 67 अतिरिक्त वोटों की जरूरत है। राज्यसभा में बहुमत के लिए जादुई आंकड़ा 163 है। सत्तापक्ष की वर्तमान ताकत 142 के आसपास है, जो उसे बहुमत के आंकड़े से 21 सीट दूर रखती है। यानी वोटिंग में अगर विपक्षी पार्टियों ने वाक आउट नहीं किया और विरोध में मतदान किया तो तीनों बिलसंसद में अटक सकते हैं।
विपक्ष कर रहा परिसीमन का विरोध
विपक्ष का कहना है कि वे महिला आरक्षण के समर्थक हैं, लेकिन सरकार द्वारा इसे परिसीमन और 2029 के चुनावों से जोडऩे के कारण वे इन विधेयकों का विरोध करने को मजबूर हैं। इसे लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच रार छिड़ी है। किसी भी संविधान संशोधन विधेयक (जैसे- संविधान 131वां संशोधन विधेयक) को संसद के दोनों सदनों- लोकसभा और राज्यसभा में विशेष बहुमत से पारित होना अनिवार्य है। विशेष बहुमत का मतलब है, जहां आसान बहुमत (सिंपल मैजोरिटी) के जरिए किसी भी विधेयक को 50 फीसदी से ज्यादा सदस्यों की सहमति से पारित कराया जा सकता है, वहीं संविधान में बदलाव के प्रस्तावों के लिए यह विशेष बहुमत जरूरी है।
सत्तापक्ष और विपक्ष में जोरदार बहस
लोकसभा में बिल पर चर्चा के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष में जोरदार बहस हुई। पीएम मोदी ने महिला आरक्षण बिल से जुड़े संशोधनों पर कहा कि हमारे देश में जब जब चुनाव आया है उसमें महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का जिस-जिसने विरोध किया है। उसका हाल बुरे से बुरा किया है। कभी माफी नहीं मिली। उन्होंने कहा कि इसलिए जिनको भी इसमें राजनीति की बू आ रही है वो खुद के परिणामों को देख लें। इसी में फायदा है जो नुकसान हो रहा है उससे बच जाओगे। इसलिए इसे राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं है। इसलिए हमारी नीयत की खोट को देश की नारी शक्ति कभी माफ नहीं करेगी। वहीं प्रियंका गांधी ने कहा कि वे (पीएम) कह रहे हैं कि उन्हें इसका श्रेय नहीं चाहिए। मैं कहती हूं कि बार-बार बहकाने वाले पुरुषों को महिलाएं पहचान लेती है। सावधान हो जाइए नहीं तो पकड़े जाएंगे। इससे पहले अखिलेश यादव ने कहा कि अब भाजपा नारी को नारा बनाने की कोशिश कर रही है। जिन्होंने नारी को अपने संगठन में नहीं रखा वे उसके मान सम्मान को कैसे रखेंगे।
आप हमें सजा दे रहे हैं, यह सही नहीं है: मारन
परिसीमन विधेयक 2026 पर डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने कहा, भाजपा जो विधेयक लाई है वह दक्षिण-विरोधी और तमिलनाडु-विरोधी है। हमें लगता है कि हमारी आवाजें दबा दी जाएंगी। सिर्फ आबादी के आधार पर हमें लगता है कि यह अन्यायपूर्ण होगा। आप हमें सजा दे रहे हैं। यह सही नहीं है।
भाजपा देश को असम या कश्मीर बनाना चाहती है
सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि जब मैंने पहली बार अपनी आपत्ति उठाई थी, तब भी मैंने यही कहा था कि महिला आरक्षण की आड़ में असल मकसद कुछ और ही है। उनका असली इरादा पूरे देश को असम या कश्मीर जैसा बना देना है, ठीक उसी तरह जैसे उन इलाकों में परिसीमन किया गया था। पूरे देश की सभी राजनीतिक पार्टियां महिला आरक्षण बिल के समर्थन में एकजुट थीं। इसे 2023 में सर्वसम्मति से पास किया गया था। तो फिर, अचानक परिसीमन का यह नया मुद्दा सामने क्यों आ गया? सरकार महिलाओं को बहाना बनाकर पूरे राष्ट्रीय सिस्टम को अपने एजेंडे के हिसाब से बदलना चाहती है।
हम भाजपाई साजिश के खिलाफ: अखिलेश
अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा जानती नहीं है कि उनसे सबसे ज्यादा दुखी महिलाएं ही हैं। जब हम महिला आरक्षण पर बहस कर रहे हैं तो हमारे बिलकुल बगल में 40 हजार लोग सडक़ों पर हैं। वहां महिलाएं धरने पर बैठी हैं। वे इसलिए हैं कि उन्हें न्याय नहीं मिला रहा है। हम महिला आरक्षण के साथ हैं लेकिन भाजपाई साजिश के खिलाफ हैं। देश की सबसे बड़ी आबादी को लेकर ये चुप्पी साधे हैं। जब हम पीएम को सुनते थे तो वे कहते थे कि वे पिछड़े वर्ग से आते हैं। लेकिन संशोधन के नाम पर जो जल्दबाजी दिखा रहे हैं वो जनगणना में जातीय जनगणना न करवाने के लिए है।
महिला आरक्षण को परिसीमन के साथ न जोड़ें: गोगोई
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि हमने कानून मंत्री की बात सुनी, उनकी बातों से लग रहा था कि पहली बार सदन के अंदर महिला आरक्षण पर चर्चा हो रही है। ऐसा उन्होंने ढांचा बनाने की कोशिश की। आज से ही 3 साल पहले गृह मंत्री ने ऐसी ही बातें की थीं।अगर दोनों की बातें सुनेंगे तो 90 प्रतिशत वही बातें हैं, जो आज कानून मंत्री ने कहीं। उस समय भी ऐसी ही बातें थीं। तब भी हमने यही कहा था कि हमारी पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन इसे सरल कीजिए, ताकि जब पारित हो तभी लागू हो जाए। इसे परिसीमन के साथ न जोड़ें।


