रांची । बोकारो से 3.15 करोड़ और हजारीबाग से 15.41 करोड़ की अवैध निकासी का मामला सामने आने के बाद वित्त विभाग राज्य की सभी 33 ट्रेजरी और सब ट्रेजरी से हुई निकासी की जांच करायी जायेगी। राज्य सरकार की एजेंसी ही इसकी जांच करेगी।वित्त सचिव ने तीन वर्षों से जमे बिल कलर्क को हटाने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा है कि पदस्थापन के तीन वर्ष पूरा करने वाले बिल कलर्क को विशेष परिस्थिति में अनुमति के बाद ही रखना है।उन्होंने राज्य के सभी एसपी और एसएसपी के साथ कोषागार पदाधिकारी को पत्र लिख कर विपत्रों की निकासी से पूर्व आवश्यक सावधानी बरतने को कहा है।
वित्त सचिव ने अधिकारियों को भुगतान में सावधानी बरतने का दिया निर्देश है। उन्होंने कहा है कि हर निकासी व व्ययन पदाधिकारी सूचनाओं का मिलान सर्विस बुक से करने के बाद उनके वेतन का भुगतान करें। सभी कर्मियों का वेतन भुगतान उनके पक्ष निर्गत पे-स्लिप, सर्विस बुक में अंकित लेखा सत्यापन के आधार पर करें।वेतन भुगतान से पूर्व कर्मियों के बैंक खाता का सत्यापन हो। निकासी व व्ययन पदाधिकारी किसी भी परिस्थिति में अपना ओटीपी किसी से शेयर ना करें।वित्त सचिव ने अधिकारियों को गाइडलाइन जारी करते हुए कहा कि विभागीय स्तर पर समीक्षा के बाद दोनों ही मामलों में कुछ गलतियां सामने आयी हैं।
इस पर ध्यान देने की जरूरत है।वित्त सचिव ने बताया कि सेवानिवृत्त कर्मी या वैसे कर्मी, जो वास्तविक रूप से कार्यालय में कार्यरत नहीं थे, उन्होंने कार्यालय का पंजी मिलान किये बिना ही भुगतान कर दिया गया। सेवानिवृत्त व्यक्ति के जीपीएफ प्रोफाइल में जन्म तिथि बदल कर उसे कार्यरत बताया गया।कर्मियों के वेतन भुगतान से पूर्व अनुमान्य वेतन की जांच नहीं की जा रही है।हजारीबाग में कार्यालय में अनुमान्य वेतन से कहीं ज्यादा वेतन दिया गया। सितंबर माह 2025 से पूर्व एक ही मोबाइल नंबर पर बिल क्लर्क और निकासी व व्ययन पदाधिकारी दोनों का ओटीपी आता रहा।


