मुंबई । मुंबई में एक बड़े बैंक घोटाले का मामला सामने आया है, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 16.95 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त कर ली है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है, जिसमें कुल 33 चल और अचल संपत्तियां शामिल हैं। ये संपत्तियां हिरेन भानु और उनके परिवार से जुड़ी बताई जा रही हैं। ईडी ने यह जांच मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। इस एफआईआर में करीब 122 करोड़ रुपये के बैंक फंड के गबन का आरोप लगाया गया है।
जांच के दौरान सामने आया कि एनआईसीबी बैंक के पूर्व जनरल मैनेजर और हेड ऑफ अकाउंट्स हितेश प्रवीनचंद्र मेहता ने इस घोटाले में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने अकाउंटिंग सिस्टम में हेरफेर कर और फर्जी लेन-देन दिखाकर बैंक के पैसे का दुरुपयोग किया। मेहता ने लंबे समय तक पैसे निकालने की बात भी कबूल की है। तफ्तीश में यह भी खुलासा हुआ कि यह सभी लेन-देन बैंक के पूर्व चेयरमैन और वाइस चेयरमैन हिरेन रंजीत भानु के निर्देश पर किए गए थे। हिरेन भानु ने कई वर्षों तक बैंक के कामकाज पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नियंत्रण बनाए रखा।
उनकी पत्नी गौरी भानु, जो कुछ समय के लिए बैंक की कार्यवाहक चेयरमैन और वाइस चेयरमैन भी रहीं, को भी इस घोटाले से लाभ मिलने की बात ईडी ने कही है। आरोप है कि भानु दंपत्ति ने कम से कम 26 करोड़ रुपये का फायदा उठाया। जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। बताया गया है कि हिरेन भानु ने कुछ कर्जदारों के साथ मिलकर विदेश की कंपनियों को बिना भुगतान अपने कब्जे में लिया और फिर भारत से लिए गए कर्ज के पैसे को उन कंपनियों के खातों में ट्रांसफर किया। एनआईसीबी बैंक द्वारा जिन कर्जदारों को बड़ी रकम दी गई थी, उन्हीं के माध्यम से यह पूरा खेल रचा गया। इस मामले में आर्थिक अपराध शाखा पहले ही आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। हिरेन भानु के खिलाफ गैर-जमानती वारंट और लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया है। फिलहाल आरोपी देश से बाहर हैं और जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। ईडी के मुताबिक, इस घोटाले में बैंक और जमाकर्ताओं दोनों को भारी नुकसान हुआ है। बहरहाल अब यह पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है कि गबन की गई राशि आखिर कहां-कहां इस्तेमाल की गई।


