आउटसोर्सिंग नियुक्तियों में गड़बड़ी पर सदन में हंगामा, प्रदीप यादव ने लगाए शोषण के आरोप
रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आउटसोर्सिंग कंपनियों के जरिए मेनपावर नियुक्ति में अनियमितताओं को लेकर सदन में जोरदार हंगामा हुआ। विधायक प्रदीप यादव ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कई कंपनियां युवाओं से पैसे लेकर नौकरी दिलाने का काम कर रही हैं, जिससे उनका शोषण हो रहा है।।विधायक प्रदीप यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने आउटसोर्सिंग व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए नियमावली बनाई है, लेकिन उसका पालन नहीं हो रहा। उन्होंने कहा कि नियुक्ति के नाम पर पैसे मांगे जाने की खबरें मीडिया में भी सामने आई हैं, बावजूद इसके अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
इस पर संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि आउटसोर्सिंग कर्मियों के शोषण को रोकने के लिए कैबिनेट द्वारा स्पष्ट नियमावली बनाई गई है।
उन्होंने बताया कि विभागों में जरूरत के अनुसार जैप आईटी प्रणाली से एजेंसियों का चयन होता है। वर्तमान में 14 एजेंसियां सूचीबद्ध हैं।
एजेंसियों का काम योग्यता और अनुभव के आधार पर चयन करना है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि कोई एजेंसी निर्धारित शुल्क से अधिक पैसे मांगती है, तो जांच के बाद उसे ब्लैकलिस्ट करने का प्रावधान है।
बहस के दौरान विधायक प्रदीप यादव ने दोबारा सवाल उठाते हुए पूछा कि नियमावली के बावजूद ऐसे मामलों में कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। उन्होंने नियुक्तियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।
मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने भी माना कि मामला गंभीर है। उन्होंने कहा कि कई बार आरक्षण रोस्टर का सही पालन नहीं हो पाता, जिस पर सख्ती जरूरी है। सरकार की ओर से कहा गया कि विभागीय कामकाज में तेजी के लिए आउटसोर्सिंग व्यवस्था जरूरी है, लेकिन इसमें पारदर्शिता, नियमों का पालन और स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देना सुनिश्चित किया जाएगा।
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लिट्टीपाड़ा में 217 करोड़ की जलापूर्ति योजना में देरी पर बवाल, हेमलाल मुर्मू ने की जांच की मांग
रांची। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान लिट्टीपाड़ा प्रखंड की बहु-ग्रामीण पाइप जलापूर्ति योजना में भारी देरी का मामला सदन में उठा। विधायक हेमलाल मुर्मू ने योजना में अनियमितता और लापरवाही का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की।
विधायक ने कहा कि ड्राई जोन क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2017 में 217.51 करोड़ रुपये की लागत से योजना स्वीकृत हुई थी, जिसे 2020 तक पूरा होना था। लेकिन 2026 तक केवल 4 में से 1 जलमीनार ही बन पाई। पाइपलाइन का काम अधूरा है। योजना का लाभ लोगों तक नहीं पहुंच सका।
उन्होंने आरोप लगाया कि इतने वर्षों में न किसी अधिकारी, इंजीनियर या ठेकेदार पर कार्रवाई हुई और न ही कोई जवाबदेही तय की गई। विधायक ने कहा कि योजना में “गंभीर गड़बड़ी” हुई है और इसकी उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए, ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो सके। मामले पर मंत्री योगेन्द्र प्रसाद ने बताया कि योजना में देरी का मुख्य कारण कोविड-19 और अन्य प्रक्रियात्मक बाधाएं रही हैं। उन्होंने कहा कि परियोजना को समय-समय पर एक्सटेंशन दिया गया। पीडब्ल्यूडी की एनओसी की प्रक्रिया जारी है। सरकार का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक योजना को पूरा करना है। मंत्री ने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर योजना की जांच कराई जाएगी।
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आईटीआई कॉलेज में चल रहा एफसीआई गोदाम, छात्रों की पढ़ाई प्रभावित : एमटी राजा
रांची। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान राजमहल विधानसभा क्षेत्र की समस्या को उठाते हुए विधायक मोहम्मद ताजमुद्दीन ने उधवा प्रखंड के मोहनपुर स्थित आईटीआई कॉलेज में एफसीआई गोदाम संचालित होने का मामला सदन में रखा। विधायक ने कहा कि आईटीआई कॉलेज भवन में वर्तमान में एफसीआई का गोदाम चल रहा है, जिसके कारण तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों को अन्य स्थानों पर जाकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। इससे छात्रों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि आईटीआई परिसर से एफसीआई गोदाम को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाए, ताकि वहां नियमित रूप से आईटीआई की पढ़ाई शुरू हो सके। विधायक ने कहा कि इससे क्षेत्र के युवाओं को स्थानीय स्तर पर तकनीकी शिक्षा का लाभ मिलेगा और उन्हें बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
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अब मनरेगा से होगी चेक डैम की मरम्मत : हफीजुल हसन
रांची । विधानसभा में जल संसाधन से जुड़े एक अन्य सवाल पर मंत्री हफीजुल हसन ने बताया कि राज्य में बने चेक डैम और सीरीज ऑफ चेक डैम की मरम्मत की जिम्मेदारी जल संसाधन विभाग की नहीं, बल्कि मनरेगा के तहत की जाएगी। सिमरिया से भाजपा विधायक कुमार उज्ज्वल दास ने सदन में यह मुद्दा उठाया था कि मरम्मत के अभाव में कई चेक डैम जर्जर हो चुके हैं और जल जमाव की समस्या बढ़ रही है। इसके साथ ही, लिफ्ट इरिगेशन योजनाएं भी बेकार हो गई हैं, जिससे किसानों को सिंचाई का लाभ नहीं मिल रहा। मंत्री ने आश्वासन दिया कि इस मामले की जांच कराई जाएगी और जरूरत पडऩे पर इंटकवेल का निर्माण भी कराया जाएगा। लातेहार के चंदवा स्थित जगराहा डैम को लेकर पूछे गए सवाल पर मंत्री हफीजुल हसन ने स्पष्ट किया कि यह निजी डैम (राजा का तालाब) है, इसलिए इसका सौंदर्यीकरण जल संसाधन विभाग के दायरे में नहीं आता।
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विधायक देवेंद्र कुंवर ने की जरमुंडी को अनुमंडल और नोनीहाट को प्रखंड बनाने की मांग
रांची। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान जरमुंडी को अनुमंडल बनाने की मांग जोरदार तरीके से उठाई गई। विधायक देवेंद्र कुंवर ने कहा कि दुमका जिले का जरमुंडी क्षेत्र अनुमंडल बनने की सभी अहर्ताएं पूरी करता है, ऐसे में इसे जल्द अनुमंडल का दर्जा दिया जाना चाहिए। विधायक ने कहा कि वर्तमान में जरमुंडी और बासुकिनाथ के बीच करीब 30 किलोमीटर की दूरी है, जिससे लोगों को प्रशासनिक कार्यों के लिए काफी परेशानी होती है। उन्होंने यह भी मांग उठाई कि नोनीहाट को अलग प्रखंड बनाया जाए, क्योंकि कई पंचायतों के लोगों को 10-12 किलोमीटर दूर आना-जाना पड़ता है।
मामले पर मंत्री दीपक बिरुवा ने बताया कि जरमुंडी को अनुमंडल बनाने से संबंधित प्रस्ताव विभाग के पास उपलब्ध है और इस पर प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि मामला कमेटी के स्तर पर विचाराधीन है। राजस्व विभाग की अधिसूचना के अनुसार 2026-27 तक प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव नहीं किया जा सकता। इस कारण फिलहाल कोई निर्णय लेना संभव नहीं है। सदन में उठे इस मुद्दे पर सरकार ने प्रस्ताव लंबित होने की जानकारी दी, लेकिन वर्तमान नियमों के चलते तत्काल निर्णय संभव नहीं बताया। विधायक ने क्षेत्र के लोगों की सुविधा को देखते हुए जल्द सकारात्मक निर्णय की मांग की।
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जामा में सब्जी प्रोसेसिंग यूनिट खोला जाए : लुईस मरांडी
रांची। झारखंड विधानसभा बजट सत्र के दौरान शून्यकाल में जामा विधानसभा क्षेत्र की समस्याओं को उठाते हुए विधायक डॉ लुईस मरांडी ने सरकार से सब्जी प्रोसेसिंग इकाई स्थापित करने की मांग की। विधायक ने कहा कि जामा के रामगढ़ प्रखंड मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र हैं, जहां किसान अनाज के साथ-साथ बड़े पैमाने पर सब्जी की खेती करते हैं। इसके बावजूद उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि क्षेत्र में सब्जी प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना की जाए, ताकि किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिल सके और उनकी आय में वृद्धि हो। विधायक ने कहा कि इस पहल से न केवल किसानों को लाभ मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
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पाकुड़ में हाई स्कूल की कमी का मुद्दा उठा
रांची। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान पाकुड़ जिले के पाकुड़ प्रखंड में तीन पंचायत उच्च विद्यालय की कमी का मामला सदन में उठा। विधायक निसात आलम ने कहा कि क्षेत्र के कई पंचायतों में हाई स्कूल नहीं होने से छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। तीन पंचायतों के छात्रों को परेशानी हो रही है। विधायक ने बताया कि सीतापहाड़ी, नसीपुर और चंगाडांगा पंचायतों में एक भी उच्च विद्यालय नहीं है। इसके कारण विद्यार्थियों को दूर जाना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल आने-जाने के दौरान छात्रों को रेलवे लाइन पार करनी पड़ती है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। विधायक ने जनहित में मांग की कि मध्य विद्यालय सीतापहाड़ी को उत्क्रमित कर माध्यमिक विद्यालय बनाया जाए और क्षेत्र में आवश्यक शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकसित की जाए। सरकार की ओर से जवाब देते हुए मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि संबंधित क्षेत्र में जमीन की उपलब्धता बड़ी चुनौती है, जिसके कारण नए स्कूल निर्माण में दिक्कत आ रही है। मंत्री ने आश्वासन दिया कि वैकल्पिक व्यवस्था के तहत स्कूल निर्माण का प्रयास किया जाएगा। आवश्यकता होने पर मल्टी-स्टोरी (हाई-राइज) भवन बनाकर भी स्कूल संचालित किए जा सकते हैं। अधिकारियों को स्थल निरीक्षण के लिए भेजा जाएगा।
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बिना पूर्ण अनुमति शुरू हुआ फ्लाईओवर निर्माण हादसे में मौत पर मुआवजा नहीं : उदय शंकर सिंह
रांची। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सारठ विधानसभा क्षेत्र में बन रहे रोड ओवर ब्रिज (फ्लाईओवर) को लेकर गंभीर सवाल उठे। विधायक उदय शंकर सिंह ने आरोप लगाया कि बिना पूरी स्वीकृति और प्रक्रिया के ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया, जिससे एक व्यक्ति की जान चली गई, लेकिन उसे मुआवजा तक नहीं मिल पाया। विधायक ने कहा कि जामताड़ा जिले में दो ओवरब्रिज निर्माण की स्वीकृति तो मिल गई, लेकिन जमीन अधिग्रहण (लैंड एक्विजिशन) नहीं हुआ भुगतान की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई प्रशासनिक और तकनीकी स्वीकृति अधूरी रही। इसके बावजूद निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया और करीब 67 पिलर का फाउंडेशन भी बना दिया गया। इसी दौरान एक हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, लेकिन स्वीकृति अधूरी होने के कारण उसे किसी तरह का मुआवजा नहीं मिल सका।
इस पर मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि पिंडारी-कर्माटांड़-अंबेडकर चौक फ्लाईओवर परियोजना केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के तहत संचालित है, जबकि सड़क निर्माण राज्य सरकार के पथ निर्माण विभाग द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि परियोजना ‘सेतु बंधन’ योजना के तहत स्वीकृत है। रेलवे से जनरल ड्राइंग का अनुमोदन आवश्यक होता है। यह अनुमोदन 2 वर्ष तक मान्य रहता है। पुराने अनुमोदन की अवधि समाप्त होने के कारण प्रस्ताव फिर से रेलवे को भेजा गया है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि रेलवे से अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद ही निर्माण कार्य आगे बढ़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि हादसे में मृत व्यक्ति के मुआवजे से जुड़ी जानकारी अलग से उपलब्ध कराई जाएगी।


