एस.के. झा. ‘सुमन’
दुमका: एक तरफ पश्चिम एशिया के आसमान से बरसते मिसाइल और बारूद ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की नींव हिला दी है, तो दूसरी तरफ इसकी तपिश झारखंड के दुमका की रसोइयों तक पहुँचने लगी है। अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने न केवल दुनिया की सप्लाई चेन को छिन्न-भिन्न किया है, बल्कि करोड़ों भारतीय परिवारों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।
आलम यह है कि गैस सिलेंडर की बुकिंग के लिए उपभोक्ताओं को हफ्तों का इंतजार करना पड़ रहा है। विडंबना देखिए एक ओर सरकार घरेलू एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति के बड़े-बड़े दावे कर रही है, तो दूसरी ओर अंचित गैस एजेंसी, एचपी गैस एजेंसी खुला हुआ तो था पर कुसुम गैस एजेंसी जैसे केंद्रों के बाहर गैस गोदाम में नहीं रहने और लटका ‘लिंक फेल’ का बोर्ड इन दावों की हवा निकाल रहा है। आखिर वैश्विक तनाव के इस दौर में दुमका के आम आदमी की रसोई क्यों ‘लिंक फेल’ के भरोसे है? क्या यह वास्तव में तकनीकी खराबी है या आने वाले किसी बड़े संकट की आहट? आइए, इस जमीनी हकीकत की गहराई से पड़ताल करते हैं।
——————————————————————————
रसोई गैस की किल्लत या सॉफ्टवेयर का पेच? उपभोक्ताओं में हाहाकार
शहर में इन दिनों रसोई गैस को लेकर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। गैस एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं की लंबी कतारें और उनके चेहरों पर साफ झलकती चिंता व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा कर रही है।
——————————————————————————
उपभोक्ताओं का दर्द: कालाबाजारी या लापरवाही?
कुसुम गैस एजेंसी कि उपभोक्ता अमिनेष कुमार श्रीवास्तव जैसे कई उपभोक्ताओं का सीधा आरोप है कि ‘आपदा को अवसर’ बनाया जा रहा है। गैस उपलब्ध होने के बाद भी एजेंसियां बोर्ड लगाकर गायब हैं।
——————————————————————————
अंचित गैस एजेंसी के उपभोक्ता मोहम्मद अब्बास का कहना है कि समाचारों में आपूर्ति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत में बुकिंग तक नहीं हो पा रही है।
——————————————————————————
मुन्नी दास जैसी गृहिणियां बुकिंग नंबर न लगने और अचानक आई इस किल्लत से बेहद परेशान हैं, उन्हें डर है कि कहीं पर्दे के पीछे कालाबाजारी तो नहीं हो रही।
——————————————————————————
अंचित गैस एजेंसी की उपभोक्ता आशा देवी ने एजेंसी पर आरोप लगाया कि यह मनमानी कर रहा है और किल्लत बढ़कर अवैध वसूली करने की तैयारी में है। नंबर ही नहीं लग रहा है एजेंसी के पास आए हैं तो वह कुछ और ही बता रहा है।
——————————————————————————
एजेंसी का पक्ष: अपग्रेडेशन बना रुकावट
दूसरी ओर, गैस वितरण केंद्रों का तर्क है कि समस्या आपूर्ति की नहीं, बल्कि सॉफ्टवेयर अपग्रेडेशन की है। नई व्यवस्था के तहत अब ओटीपी अनिवार्य होगा और पैनिक बुकिंग रोकने के लिए दो सिलेंडरों के बीच 25 दिनों का अंतराल तय किया गया है।
——————————————————————————
समाधान की आस
एजेंसी दावा है कि स्थिति जल्द सामान्य होगी। आपात जरूरत के लिए आधार कार्ड पर 2 और 5 लीटर के छोटे सिलेंडर उपलब्ध हैं। अब देखना यह है कि यह ‘तकनीकी सुधार’ कब तक उपभोक्ताओं की रसोई तक सुचारू रूप से गैस पहुँचा पाता है।


