छोटे शहर की बड़ी उड़ान: दुमका की सुदीपा दत्ता ने सिविल सेवा में लहराया परचम, हासिल की 41वीं रैंक
राजकीय लाइब्रेरी से पढ़कर आई.ए.एस. बनी सुदीपा, तीसरे प्रयास में मिली कामयाबी
एस.के.झा.’सुमन’
दुमका। झारखंड की उपराजधानी दुमका की सुदीपा दत्ता ने इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है। एक साधारण डाककर्मी की बेटी ने बिना किसी बड़े महानगर के कोचिंग कल्चर में जाए बिना ,दुमका में रहकर ही देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 41वीं रैंक हासिल की है। जेपीएससी सीडीपीओ परीक्षा में 24वीं रैंक के बाद अब सुदीपा की इस ऐतिहासिक सफलता ने साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या सुविधाओं की मोहताज नहीं होती। आइए जानते हैं सुदीपा के इस ‘साधारण से असाधारण’ बनने के सफर की कहानी, उनकी अपनी जुबानी।
—————–
सुदीपा जी, इस शानदार सफलता के लिए आपको बहुत बधाई।
सुदीपा दत्ता: धन्यवाद ।
सवाल : आपके परिवार में माता-पिता के अलावा कौन-कौन सदस्य हैं।
सुदीपा दत्ता: तीन भाई बहनों में से सबसे बड़ी मै हूं । मेरी छोटी बहन बी कॉम कर रही है और छोटा भाई नौवीं कक्षा में है।
सवाल : जब आपने पहली बार रिजल्ट में अपना नाम और 41वीं रैंक देखी, तो आपकी और आपके माता-पिता की पहली प्रतिक्रिया क्या थी?
सुदीपा दत्ता: फर्स्ट टाइम तो विश्वास ही नहीं हुआ, अनबीलिभेबल जैसे कोई हसीन सपना सच हो गया हो। आंखों में खुशी के आंसू और मन में गर्व का एहसास था। धीरे-धीरे रियलिटी का एक्सेप्ट हुआ तो अच्छा लगने लगा।
सवाल : एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से निकलकर देश के सर्वोच्च पद तक पहुँचने का यह सपना आपने कब और कैसे देखा?
सुदीपा दत्ता : यह सपना मेरी आँखों में तब सजा, जब मैं बांका के अपने स्कूल में पढ़ रही थी। साल 2012 में बांका जिला के तत्कालीन डीएम दीपक आनंद हमारे विद्यालय में मुख्य अतिथि बनकर आए थे। उनके व्यक्तित्व और समाज के लिए उनके काम करने के जज्बे ने मुझे इतना प्रभावित किया कि मैंने वहीं से देश के सर्वोच्च पदों पर पहुँचने का संकल्प ले लिया।
शिक्षण के क्षेत्र में रहने के दौरान मैंने खुद को एक वर्ष का समय यूपीएससी को देने का निर्णय लिया। जब पहले ही प्रयास में मैं इंटरव्यू तक पहुँच गई, तो मेरा आत्मविश्वास बढ़ गया। अंततः अपनी कड़ी मेहनत और निरंतरता के बल पर, मैंने तीसरे प्रयास में अपनी मंजिल हासिल कर ली।
सवाल : आपने दिल्ली या अन्य बड़े शहरों के बजाय दुमका में रहकर तैयारी की। क्या आपको कभी लगा कि आप संसाधनों की कमी का सामना कर रही हैं? आपने इसका हल कैसे निकाला?
सुदीपा दत्ता: मैंने दिल्ली के बजाय पारिवारिक सहयोग और घर के बेहतर माहौल को चुना। मेरे लिए संसाधनों से ज्यादा परिवार का साथ जरूरी था।
सवाल : यह आपका तीसरा प्रयास था। पिछले दो प्रयासों से आपने क्या सीखा और इस बार अपनी रणनीति में क्या बड़े बदलाव किए?
सुदीपा दत्ता: सर, पिछले दो प्रयासों से मैंने सबसे बड़ी बात यह सीखी कि अपनी रणनीति को लेकर डिप्रैस नहीं होना चाहिए। अगर कोई तरीका काम नहीं कर रहा, तो उसे अहंकार का विषय बनाने के बजाय समय रहते सुधार करना जरूरी है। इस बार मैंने अपनी रणनीति में मुख्य रूप से तीन बड़े बदलाव की जिसमें लचीलापन, निरंतर सुधार, और प्रिपरेशन को अपग्रेड करने पर ध्यान दिया।
सवाल: आपने किस माध्यम से यूपीएससी की परीक्षा दी?
सुदीपा दत्ता: मैंने अंग्रेजी माध्यम से यूपीएससी की परीक्षा दी है।
सवाल : यूपीएससी के विस्तृत सिलेबस को आपने कैसे मैनेज किया? आपका वैकल्पिक विषय क्या था और उसे चुनने का आधार क्या रहा?
सुदीपा दत्ता: सिलेबस को छोटे टॉपिक्स और प्रीवियस ईयर क्वेश्चन से देखकर इंर्पोटेंट सेक्शंस पर ज्यादा ध्यान दिया । मेरा वैकल्पिक विषय सोशियोलॉजी था, यह मेरे ग्रेजुएशन में भी सब्जेक्ट था मुझे बचपन से सामाजिक विषयों में रुचि रही है इसी वजह से मैं सोशियोलॉजी को अपना ऑप्शनल सब्जेक्ट चुना।
सवाल : आप हाल ही में जेपीएससी की सीडीपीओ परीक्षा में भी सफल रही थीं। राज्य सेवा और केंद्र सेवा की तैयारी को आपने एक साथ कैसे तालमेल बैठाया?
सुदीपा दत्ता: मुख्य तैयारी केंद्रीय सिविल सेवा की थी। मैनें केवल एक महीने विशेष रूप से झारखंड के सामान्य ज्ञान पर फोकस किया । जिसका लाभ मुझे यूपीएससी की परीक्षाओं में भी मिला। मुझे इस वजह से तैयारी के दौरान राज्य एवं केंद्र की परीक्षाओं में तालमेल बैठाने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई।
सवाल : तैयारी के दौरान कई बार असफलता मिलने पर ‘लो फेज’ आता है। खुद को मोटिवेटेड रखने के लिए आपने क्या किया?
सुदीपा दत्ता: असफलता के बाद मैंने परिवार से दिल की बात की, दोस्तों संग खासकर छोटी बहन के साथ बाहर घूमा और बहन के साथ खुशनुमा समय बिताकर खुद को रिचार्ज किया।
सवाल : झारखंड और विशेषकर दुमका जैसे छोटे शहरों के छात्र अक्सर सोचते हैं कि यूपीएससी उनके बस की बात नहीं है। आप उन्हें क्या सलाह देना चाहेंगी?
सुदीपा दत्ता: यूपीएससी के लिए खुद की रणनीति और जुनून सबसे जरूरी है। बाहरी मदद लें, पर अपनी मेहनत और हौसले पर भरोसा रखें।
सवाल : सेल्फ स्टडी पर आपकी क्या राय है? क्या आज के डिजिटल दौर में घर बैठे अधिकारी बना जा सकता है?
सुदीपा दत्ता: बिल्कुल, सेल्फ-स्टडी ही असली ताकत है। आज के डिजिटल युग में सही संसाधनों से घर बैठे अधिकारी बनना पूरी तरह संभव है।
सवाल : अब आप एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में देश की सेवा करेंगी। समाज के किस क्षेत्र जैसे महिला सशक्तिकरण, शिक्षा या ग्रामीण विकास में आप सबसे पहले बदलाव लाना चाहेंगी?
सुदीपा दत्ता: मैं शिक्षा को प्राथमिकता दूँगी, क्योंकि शिक्षित समाज ही महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास की नींव रखकर स्थायी बदलाव ला सकता है। साथ ही बतौर प्रशासनिक अधिकारी मैं विकास के के सभी क्षेत्रों में कार्य करूंगी।


