●दुमका,पाकुड़ और साहिबगंज में वन सीमा से एक किमी के दायरे में है 300 से अधिक खदान-क्रशर
सुमन सिंह
दुमका। वनों की सीमा से एक किमी के दायरे में पत्थर खदानों और क्रशरों को पर्यावरण सहमति (ईसी) देने पर हाइकोर्ट के रोक के आदेश का संताल परगना के पत्थर मंडियों पर व्यापक असर पड़ेगा।एक अनुमान के मुताबिक संताल परगना के दुमका, पाकुड़ और साहिबगंज में करीब 300 से अधिक पत्थर खदान और क्रशर वन क्षेत्र से 250 मीटर से 500 मीटर की दूरी पर हैं।दुमका के गोपीकांदर स्थित पत्थर मंडी सहित शिकारीपाड़ा और पाकुड़-साहिबगंज की कई पत्थर मंडी प्रभावित होने वाली है।झारखंड उच्च न्यायालय ने एक किमी के दायरे में अवस्थित खदान-क्रशरों की सूची भी जमा करने का आदेश दिया है।
झारखंड उच्च न्यायालय ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर जो अहम अंतरिम आदेश दिया है उसमें अदालत ने स्पष्ट किया है कि झारखंड राज्य में किसी भी संरक्षित या आरक्षित वन की सीमा से 1 किलोमीटर के भीतर स्टोन क्रशर या स्टोन खनन की अनुमति नहीं दी जाएगी।उच्च न्यायालय ने पाया कि झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) द्वारा पहले जारी की गई कुछ अधिसूचनाओं में वन क्षेत्र से दूरी घटाकर 250 मीटर कर दी गई थी, जो कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप नहीं है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही यह निर्देश दे चुका है कि संरक्षित वनों और अभयारण्यों के चारों ओर कम से कम 1 किलोमीटर का ईको-सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) होना चाहिए।
कोर्ट ने कहा है कि पर्यावरण से जुड़े मामलों में एहतियाती सिद्धांत लागू होगा और किसी भी प्रकार की ढील से वन, वन्यजीव और स्थानीय पर्यावरण को नुकसान हो सकता है।अदालत ने JSPCB को निर्देश दिया है कि 1 किलोमीटर के दायरे में कोई नया पर्यावरण सहमति(ईसी)/अनुमति न दिया जाए
पहले से दी गई अनुमतियों की सूची तैयार कर कोर्ट में पेश करने का भी हाईकोर्ट ने निर्देश जारी किया है।
अवैध खनन और क्रशर संचालन पर कड़ी निगरानी रखी जाए।यह मामला अब 17 मार्च 2026 को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
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क्या है हाइकोर्ट का JSPCB को निर्देश
●एक किमी ईको-सेंसिटिव जोन (ESZ) के भीतर कोई नया कंसेंट जारी न करें
●पहले से दिए गए सभी कंसेंट का तत्काल सर्वेक्षण करें
●सभी मौजूदा कंसेंट की सूची न्यायालय में दाखिल करें
●1 किमी बफर ज़ोन के भीतर अनधिकृत खनन/क्रशर संचालन पर सतत निगरानी रखें
●अनुपालन की सत्य एवं ईमानदार रिपोर्ट प्रस्तुत करें
● JSPCB के सदस्य सचिव द्वारा व्यक्तिगत रूप से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए
●संरक्षित वनों की स्पष्ट सीमांकन सुनिश्चित करें
● ईको-सेंसिटिव जोन (ESZ) क्षेत्र में किसी भी नई गतिविधि की अनुमति न दें
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स्टोन माइन / क्रशर संचालकों को सलाह
●1 किमी ईको-सेंसिटिव जोन(ESZ) के भीतर नई स्थापना या विस्तार न करें
● यदि पहले से कंसेंट है, तो कानूनी हेतु तैयार रहें
● न्यायालय/प्रशासन के निर्देशों का पालन करें


