रांची । झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन की कार्यवाही प्रश्नकाल से शुरू हुई, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की ओर से कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। विधि-व्यवस्था, विकास कार्यों और प्रशासनिक गतिविधियों को लेकर सदस्यों ने सरकार से सवाल पूछे। झामुमो विधायक स्टीफन मरांडी के ध्यानाकर्षण प्रश्न का जवाब देते हुए मंत्री चमरा लिंडा ने घोषणा की कि राज्य सरकार आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका की नियुक्ति में आरक्षण लागू करने जा रही है। इस मुद्दे पर लंबे समय से मांग उठती रही है, जिसे सरकार ने सकारात्मक रूप से स्वीकार किया है। मंत्री ने कहा कि प्रक्रिया जल्द ही नियमों के अनुसार आगे बढ़ाई जाएगी। दो महत्वपूर्ण विधेयक पारित सदन ने झारखंड पर्यटन विकास एवं निबंधन संशोधन विधेयक, 2025 को ध्वनिमत से पारित किया। इस विधेयक का उद्देश्य है कि पर्यटन क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाना, प्रक्रियाओं को सरल बनाना और निवेश व विकास को प्रोत्साहित करना है। सत्र के दौरान एक अन्य विधेयक भी पारित किया गया, जिससे विधानसभा की कार्यवाही और अधिक प्रभावी बनाने का रास्ता साफ हुआ।
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खरसावां गोलीकांड की न्यायिक जांच कराएगी सरकार : मंत्री
राज्य सरकार एक जनवरी 1948 में हुए खरसावां में हुए गोलीकांड की न्यायिक जांच कराएगी। यह घोषणा मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान बुधवार को की। मंत्री ने कहा कि इस घटना की जांच के लिए 9 जनवरी 2015 को समिति का गठन किया गया था। मामले में व्यािपक जांच पडताल की गई थी, लेकिन अब तक घटना में दो लोगों का ही नाम सामने आ सका है। मंत्री ने कहा कि वहीं समिति की ओर से कहा गया है कि घटना के समय लगभग 50 हजार से एक लाख लोगों की भीड थी। साथ ही घटना की जांच के लिए समिति के सदस्य ओडिशा और पश्चिम बंगाल भी गए थे। मंत्री ने कहा कि खरसावां गोलीकांड को लोग दूसरा जालियावाला हत्?याकांड बताते हैं। इस मामले को झामुमो के विधायक दशरथ गगराई ने उठाया। उन्होंने सरकार से घटना में मारे गये लोगों को शहीद का दर्जा देने और मृतकों की संख्या का पता लगाने के लिए जांच कराने की मांग ध्यानाकर्षण सूचना के तहत की। उन्होंने कहा कि स्थोनीय लोगों के अनुसार घटना में मारे गए लोगों के शवों को पास में मौजूद कुएं में डाल दिया गया। साथ ही ट्रक पर शवों को लादकर पहाड पर फेंक दिया गया था। विधायक ने कहा कि एक जनवरी पर जहां देशभर में नए साल का जश्नर मनाते हैं लेकिन उनके क्षेत्र के लोग नए साल में शोक में डूबे रहते हैं।
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रांची राजभवन का नाम बिरसा भवन व दुमका राजभवन का नाम सिदो-कान्हू भवन रखने प्रस्ताव
झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बुधवार को विधानसभा में खड़े हुए और प्रस्ताव रख दिया कि रांची का राज भवन अब बिरसा भवन कहलाएगा।मंत्री ने सदन में कहा कि रांची का मुख्य राज भवन का नाम बिरसा भवन होगा, भगवान बिरसा मुंडा के सम्मान में। वहीं दुमका का राज भवन सिदो-कान्हू भवन कहलाएगा, संताल विद्रोह के नायकों सिदो और कान्हू मुरमू के नाम पर होगा। वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि राजभवन राज्य सरकार की संपत्ति है। संविधान के अनुच्छेद 154 के तहत राज्य की कार्यकारी शक्ति गवर्नर में होती है, इसलिए उनका कार्यालय भी राज्य का हिस्सा है। संपत्ति पर नाम रखने का पूरा अधिकार राज्य सरकार को है।बता दें कि केंद्र सरकार ने 3 दिसंबर को पूरे देश में सभी राज भवनों का नाम लोक भवन करने का आदेश दिया था। झारखंड ने भी तुरंत इसे लागू कर दिया। लेकिन अब राज्य सरकार ने अपना अलग प्रस्ताव पेश कर दिया है।रांची का राज भवन 52 एकड़ में फैला है।इसके साथ 10 एकड़ में ऑड्रे हाउस भी है।इसकी नींव 1930 में पड़ी थी और मार्च 1931 में सिर्फ 7 लाख रुपये की लागत से बनकर तैयार हो गया था।
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टाटा कमांड एरिया में संपत्ति की रजिस्ट्री बंद होने की शिकायत पर होगी कार्रवाई : मंत्री
टाटा कमांड एरिया में संपत्ति की रजिस्ट्रीं बंद होने की सामुहिक शिकायत मिलने पर सरकार जरूर कार्रवाई करेगी। यह मामला लीज से संबंधित है। इसलिए जब तक विभाग को मामले को लेकर शिकायत नहीं मिलेगी कार्रवाई करना संभव नहीं होगा। झारखंड के राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री दीपक बिरूवा ने शीताकलीन सत्र के दौरान बुधवार को ये बातें विधानसभा में कही। मंत्री ने जमशेदपुर पूर्वी की भाजपा विधायक पूर्णिमा साहु के तारांकित प्रश्न का जवाब देते हुए कहा कि इस संबंध में विभाग के पास कोई शिकायत नहीं मिली है। ऐसे में कैसे कार्रवाई की जा सकती है। इसपर विधायक पूर्णिमा साहु ने कहा कि मामले में जो उन्हें उत्तर प्राप्त हुआ है, उसमें अस्वीकारात्मक लिखा है। इसका अर्थ है कि संपत्ति की रजिस्ट्री बंद नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि टाटा कमांड एरिया में पिछले 60-70 वर्षों से संपत्ति की रजिस्ट्री हो रही थी, लेकिन बताया जा रहा है कि अब रजिस्ट्री नहीं हो रही है। विधायक ने कहा कि इससे राजस्व की हानि हो रही है। उन्होंने मंत्री से मामले की जांच कराने की मांग की। वहीं मामले में जमशेदपुर पश्चिमी के जदयू विधायक सरयू राय ने कहा कि मामले में अधिकारियों की ओर से दिया गया प्रश्न का उत्तर गुमराह करनेवाला है। उन्होंने मामले में सरकार को स्थिति स्पाष्ट करने की मांग की।
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अबुआ आवास योजना : झारखंड सरकार लाभुकों को दो किस्तों में राशि देने पर करेगी विचार
झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार अबुआ आवास योजना के तहत लाभुकों को दो किस्तों में राशि देने पर विचार कर रही है। यह जानकारी राज्य की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने बुधवार को झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र में दी। मंत्री भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक शत्रुघ्न महतो के अल्पसूचित प्रश्न का जवाब दे रही थीं। विधानसभा में विधायक ने बताया कि हजारों लाभुकों को योजना की पहली किस्त मिल गई है, लेकिन दूसरी किस्त जारी नहीं होने से आवास निर्माण अधूरा है। इसके कारण लोग कड़ाके की ठंड में खुले में रात बिताने को मजबूर हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि विधानसभा चुनाव के बाद केंद्र सरकार से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक बार फंड मिला था, लेकिन उसके बाद धनराशि नहीं मिली। इसी वजह से राज्य सरकार अबुआ आवास की दूसरी किस्त जारी करने में सक्षम नहीं है। उन्होंने बताया कि सरकार को 24 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं और तीन हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है, जिसमें से 12 अरब रुपये जिलों को वितरित किए जा चुके हैं। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सुझाव दिया कि लाभुकों को दो किस्तों में राशि दी जाए, ताकि उनका घर समय पर पूरा हो सके। उन्होंने इंदिरा आवास योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि कई किस्तों में भुगतान की शिकायतें पहले भी रही हैं। मंत्री ने कहा कि सरकार इस सुझाव पर गंभीरता से विचार करेगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि केंद्र सरकार पीएम आवास योजना की राशि बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दे, तो यह जनता के हित में बेहतर कदम होगा।
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केंद्र की राशि नहीं मिलने से अधूरी हैं नल-जल की कई योजनाएं : पेयजल मंत्री
झारखंड में नल-जल योजना का कार्य धन की कमी के कारण प्रभावित हो रहा है। केंद्रांश की पर्याप्त राशि समय पर नहीं मिलने से कई जिलों में परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं। यह बातें राज्य के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने बुधवार को विधानसभा में प्रश्नों का उत्तर देते हुए कही। मंत्री ने कहा कि पूरे राज्य में इस योजना के तहत 97,535 परियोजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनमें से 56,386 पूरी हो चुकी हैं। बाकी योजनाएं निर्माणाधीन हैं और संसाधनों की कमी के चलते उनके कार्यों में देरी हो रही है। विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने बताया कि केंद्र से अपेक्षित धन उपलब्ध नहीं होने के बावजूद राज्य सरकार अपने हिस्से की 1231 करोड़ रुपये की राशि से परियोजनाओं को गति देने का प्रयास कर रही है। इससे पहले झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के विधायक हेमलाल मुर्मू ने संथाल परगना क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति योजनाओं की खराब स्थिति पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में योजनाएं चालू होते हुए भी लोगों को पीने का पानी नहीं मिल रहा है, जबकि अधूरे कार्यों के बावजूद एजेंसियों को भुगतान कर दिया गया है। उन्होंने यह भी पूछा कि लिट्टिपाड़ा और डिप्टी पाड़ा प्रखंडों में गंगा नदी से जलापूर्ति की कोई योजना लागू की जा रही है या नहीं। जवाब में मंत्री ने कहा कि गंगा नदी से प्रस्तावित जलापूर्ति योजनाओं की सूची वे संबंधित विधायक को उपलब्ध करा देंगे। मुर्मू ने आगे बताया कि इन दोनों प्रखंडों में 40 प्रतिशत से अधिक कार्य अधूरे पड़े हैं। इस पर मंत्री ने स्वीकार किया कि धन की कमी के कारण काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। लोक जनशक्ति पार्टी-रामविलास (लोजपा-आर) के विधायक जनार्दन पासवान ने आरोप लगाया कि चतरा जिले में नल-जल योजना के तहत कोई काम नहीं हुआ है और यहां “सिर्फ लूट” हुई है। उन्होंने मामले की जांच कराने की मांग की।
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झारखंड भवन में ठहरने के नियम पर सदन में सवाल, ऊर्जा विभाग गेस्ट हाउस पर भी उठे प्रश्न
झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन बुधवार को विपक्ष ने दिल्ली स्थित झारखंड भवन और ऊर्जा विभाग के गेस्ट हाउस में ठहरने से जुड़े नियमों और व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाए। इसके साथ ही नल-जल योजना और अबुआ आवास से जुड़े मुद्दे भी सदन में उठे। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड भवन में ठहरने से संबंधित नियमों को गलत बताते हुए कहा कि कैबिनेट निगरानी विभाग का यह निर्णय कि केवल विधायकों के सगे संबंधी ही झारखंड भवन में रह सकते हैं, उचित नहीं है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉ. रामेश्वर उरांव ने आलोक दूबे और लाल किशोर नाथ शाहदेव को ठहराने के लिए संबंधी बनाकर अनुशंसा की। मरांडी ने विधानसभा अध्यक्ष से पांच वर्षों का रजिस्टर मंगाने की मांग की, ताकि स्पष्ट हो सके कि झारखंड भवन में वास्तव में कौन-कौन ठहरता रहा है। मरांडी ने कहा कि दिल्ली स्थित ऊर्जा विभाग के गेस्ट हाउस के लिए राज्य सरकार हर महीने पांच लाख रुपये किराया देती है, जहां, 8 स्टाफ तैनात हैं, 4-5 वाहन उपलब्ध हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस गेस्ट हाउस में अब तक कोई विधायक ठहरा भी है या नहीं? इसकी जानकारी के लिए इस गेस्ट हाउस के रजिस्टर, ठहरने वालों की सूची, संचालन व्यवस्था, पदस्थ इंचार्ज और आवंटन प्रक्रिया की जानकारी सदन के सामने लाने की मांग की। बाबूलाल मरांडी के सवालों पर राज्य के संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है और सरकार इस पर गंभीरता से कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि इस तरह का कोई भी निर्णय कैबिनेट की स्वीकृति के बिना नहीं लिया जा सकता और नेता प्रतिपक्ष की उठाई गई मांगों की जांच कराई जाएगी।


