साहिबगंज।जिले के सदर अस्पताल भगवान भरोसे ही चल रहा है।जिला सदर अस्पताल में मरीजों को समय पर भले ही इलाज ना मिले,लेकिन झाड़ फूंक की सुविधा जरूर मिल सकती है।भले ही ज्ञान विज्ञान की बातें की जाती हो लेकिन आज भी ऐसी तस्वीरे देखने को मिल जाती है जो एक साथ कई सवाल खड़े कर देती है।जहाँ शुक्रवार की अहले सुबह सदर अस्पताल की ऊपरी तल्ला महिला वार्ड में भर्ती राजमहल निवासी मैनात खातून महिला के साथ झाड़ फूंक का खेल चल रहा था।सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार झाड़-फुक करने वाले झाड़ फूंक का चार्ज पचास रुपया व ताबीज एवं अंगूठी को देने पर मरीज से एक सौ रुपया का चार्ज किया करता है | आज भी हमारे ऐसे कई राज्य हैं जहां पर की अंधविश्वास चरम पर है।हालांकि जिन लोगों को अंधविश्वास है।उनकी पुरानी परंपरा है.और अभी भी उस परंपरा पर कायम है। वहीं अस्पताल में मरीज के साथ झाड़ फूंक का खेल सुबह से चल रहा था।अस्पताल की कर्मचारी मुख दर्शक बनकर देख रहे थे।कोई भी कर्मचारी इस झाड़ फूंक को रोकने का जहमत नहीं उठा रहे थे।इस अंधविश्वास का मंजर को देखकर अस्पताल प्रशासन पर कई सवाल खड़े कर दिए.अस्पताल प्रबंधन क्या कर रहा था.झाड़ फूंक करने वाले को अस्पताल में आने की अनुमति किसने दी क्या झाड़ फूंक करने वाले डॉक्टर के भूमिका अदा करते हैं क्या |महिला वार्ड में पुरुष की जाने की अनुमति किसने दी|
तमाम स्वास्थ्य व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए इलाज जिला स्वास्थ्य विभाग करने का दावा जो करते हैं वह क्या है सवाल उठता है|
अगर झाड़ फूंक से ही मरीज ठीक हो जाते हैं तो फिर अस्पताल क्यों आते हैं अस्पताल प्रशासन पर एक बड़ी सवाल खड़ी करती है |
इस मामले में जिले के सिविल सर्जन डॉ प्रवीण कुमार संथालिया ने बताया कि इस बारे में उसे कुछ नहीं पता है।अगर ऐसी बात है तो लोगों को जागरूक होने की जरूरत है. अंधविश्वास के चक्कर में ना पड़े अंधविश्वास के चक्कर में कई लोगों की जान भी चली गई है. किसी प्रकार की शरीर में बीमारी हो या फिर कोई शरीर में कष्ट हो फौरन ही नजदीकी अस्पताल जाए और सीधा डॉक्टर से संपर्क करें तभी ही किसी की जान बच सकती है |
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