देवघर:-हर रोज नया अध्याय सिविल सर्जन देवघर के कारनामों की चर्चा अब आम हो गई।पहले सिविल सर्जन विभाग के आदेश का हवाला देकर राज्य के इतिहास का सबसे बड़ा स्थानांतरण करते हैं।जिसमें पैमाना यह कि भ्रष्टाचार में सहयोगी बनने वाले लिपिक का स्थानांतरण एक कमरे से दूसरे कमरे में किया गया, इतने से मन नहीं भरा तो फिर आदेश जारी कर उनसे पुराने जगह पर कार्य लेने लगे और सभी महत्वपूर्ण संचिका भी उन्हें ही सोंप दिया, यह खेल सिविल सर्जन कार्यालय से निकल कर स्वस्थ्य केंद्रों तक पहुंच गया.कुछ दिनों पूर्व सारवा
से सारठ पदस्थापित लिपिक को पुनः सारवा प्रतिनियुक्त किया गया और उन्हें लेखा, आगत निर्गत सहित सभी महत्त्वपूर्ण संचिका का प्रभार सोंपने का आदेश दिया गया।नियमानुसार पदस्थापित लिपिक के रहते प्रतिनियुक्त लिपिक को महत्त्वपूर्ण संचिका का प्रभार नहीं देना चाहिए. इससे यही प्रतीत होता है। सिविल सर्जन किसी गहरे अनियमितता को दबाने के प्रयास के तौर पर ऐसा कर रहे हैं.वहीं महिला लिपिको को काम करने से रोका जा रहा है।अब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सारत के प्रभारी ने पत्र जारी कर सिविल सर्जन से अनुरोध किया है कि सारत में लिपिक की आवश्यकता है,यहां दो लिपिक थे एक का सदर अस्पताल तो दूसरे का सारवा प्रतिनियुक्ति कर दिया गया है।जब सारवा में लिपिक है और वेतन भुगतान सहित सभी कार्यों को कुशलता पूर्वक निपटा रही हैं।तो फिर सारत को खाली करके सारवा में लिपिक की प्रतिनियुक्ति कर के महत्वपूर्ण संचिका सोंप ने का आदेश किसी गंभीर अनियमितता को दर्शाता है।
WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉
Join Now

