पटना । बिहार में सूचना अधिकार कानून के तहत जानकारी मांगने वाले कार्यकर्ताओं की हत्या करा दी जाती है। पिछले 20 वर्षों में बिहार में 21 आईटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है। बिहार सरकार के मुख्य सचिव और मुख्य सूचना आयुक्त को पत्र लिखकर जिले के कार्यकर्ताओं ने जानकारी देते हुए, सुरक्षा की मांग की है।
बिहार में पिछले 20 वर्षों में 600 से अधिक आरटीआई कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमले किए गए हैं। उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाया गया है। करोड़ों रुपए के घोटाले के मामले में जानकारी नहीं देने वाले अधिकारियों पर मात्र 25000 रुपये जुर्माना करके उन्हें छोड़ दिया जाता है। न्यायालय से कार्यकर्ताओं के खिलाफ 70 फ़ीसदी मुकदमे न्यायालय में फर्जी पाए गए हैं।
बिहार में लोक सूचना पदाधिकारी ठेकेदार और अपराधी मिलकर सूचना अधिकार कानून के तहत एक तो जानकारी नहीं देते हैं। कोई कार्यकर्ता जानकारी निकालने के लिए सतत प्रयास करता है। ऐसी स्थिति में उसे झूठे मुकदमों में उलझा दिया जाता है। उसके बाद भी जब सूचना अधिकार कानून के तहत कार्यकर्ता जानकारी लेने के लिए अड़ जाता है। ऐसी स्थिति में उसकी हत्या करा दी जाती है। हत्या के बाद भी सूचना अधिकार कानून के तहत ना तो जानकारी मिलती है। नाही कार्यकर्ता के परिवार को न्याय मिल पाता है। जिसके कारण बिहार में अब सूचना अधिकार कानून को मौत के परवाने के नाम से भी जाना जाने लगा है।
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