नई दिल्ली । भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड कंप्यूटिंग, डिजिटल सेवाओं और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डेटा सेंटर का कारोबार तेजी से विस्तार कर रहा है। डेटा सेंटर को 24 घंटे बड़ी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है। इसके अलावा निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए ट्रांसफॉर्मर, स्विचगियर, बैकअप पावर, जनरेटर और कूलिंग सिस्टम जैसे उपकरण भी जरूरी होते हैं। ऐसे में डेटा सेंटर के बढ़ते विस्तार का फायदा केवल तकनीकी कंपनियों तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि बिजली और पूंजीगत सामान बनाने वाली कंपनियों को भी मिल सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक पूंजीगत सामान क्षेत्र में डेटा सेंटर निकट भविष्य में मजबूत मांग वाले क्षेत्रों में शामिल है। एबीबी इंडिया, सीमेंस, सीजी पावर, किर्लोस्कर ऑयल, थर्मैक्स और त्रिवेणी टर्बाइन जैसी कंपनियों को डेटा सेंटर से जुड़े नए ऑर्डर और कारोबार में बढ़ोतरी का लाभ मिलने की उम्मीद है। टीडी पावर भी अमेरिका में डेटा सेंटर की बढ़ती जरूरतों से जुड़े गैस जनरेटर के अवसरों पर काम कर रही है। बड़े डेटा सेंटर में हजारों सर्वर लगातार चलते हैं, जिससे बिजली की खपत के साथ गर्मी भी पैदा होती है। इसलिए बिजली आपूर्ति व्यवस्था और कूलिंग सिस्टम पर भारी निवेश करना पड़ता है।
लार्सन एंड टुब्रो की कुल ऑर्डर बुक में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 40 फीसदी है, जबकि संभावित नए ऑर्डरों में यह करीब 45 फीसदी है। हालांकि कंपनियों के कारोबार में तेजी के बावजूद पहली तिमाही में मुनाफे पर कच्चे माल की ऊंची कीमतों का दबाव रहा। एल्युमिनियम और हॉट रोल्ड कॉइल की कीमतों में हालिया नरमी से आने वाली तिमाहियों में मार्जिन सुधार की उम्मीद है। कुछ कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी भी कर चुकी हैं। ट्रांसमिशन, डेटा सेंटर और रक्षा क्षेत्र से जुड़ी पूंजीगत खर्च की थीम मजबूत बनी हुई है। ब्रोकरेज ने बड़े शेयरों में लार्सन एंड टुब्रो, कमिंस इंडिया और जीई वर्नोवा टीएंडडी को पसंद किया है। मिडकैप में कल्पतरु प्रोजेक्ट्स, रक्षा क्षेत्र में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में डिक्सन टेक्नोलॉजीज को पसंदीदा शेयरों में रखा गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि डेटा सेंटर की बढ़ती मांग का फायदा सभी कंपनियों को समान रूप से नहीं मिलेगा। शेयरों के मौजूदा मूल्यांकन, ऑर्डर की गुणवत्ता, कच्चे माल की लागत और मुनाफे के मार्जिन जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना होगा। यदि डेटा सेंटर से जुड़े ऑर्डर मजबूत बने रहते हैं और लागत का दबाव कम होता है, तो बिजली, ट्रांसमिशन, कूलिंग और बैकअप पावर से जुड़ी कंपनियों के लिए आने वाले सालों में बड़ा कारोबारी अवसर बन सकता है।


