● आउटसोर्सिंग स्वास्थ्य कर्मियों का आंदोलन गुरुवार को 20वें दिन भी जारी
● प्रशासन के अल्टीमेटम को एजेंसियों ने दिखाया ठेंगा
● वेतन में भारी कटौती और 12 महीने तक का बकाया
दुमका। पारा मेडिकल स्टाफ एसोसिएशन के नेतृत्व में स्वास्थ्य कर्मियों का आंदोलन गुरुवार को 20वें दिन भी जारी रहा। जिला प्रशासन और उप विकास आयुक्त के निर्देशों को आउटसोर्सिंग एजेंसियों द्वारा ठेंगा दिखाए जाने के बाद आंदोलनकारी कर्मियों में भारी आक्रोश है। एसोसिएशन ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी बुनियादी मांगें और बकाया वेतन का भुगतान नहीं होता, तब तक यह अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी।
एसोसिएशन के अध्यक्ष रामवृक्ष महतो ने व्यवस्था पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, श्रम मंत्री और विधायकों की होली, दशहरा, दिवाली या छठ की शुभकामनाओं से कर्मियों के पेट में रोटी नहीं जाएगी। यह उनके परिवार के सदस्यों की आजीविका और अस्तित्व का सवाल है। उन्होंने लोकतंत्र और संविधान की दुहाई देने वाले सिस्टम की घोर निन्दा की।

प्रशासन के अल्टीमेटम का एजेंसियों पर कोई असर नहीं
स्वास्थ्य कर्मी बीते 17 अक्टूबर से लगातार अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इस दौरान 29 अक्टूबर को श्रम कार्यालय दुमका का घेराव भी किया गया था। प्रदर्शन के बाद जिला प्रशासन और डीडीसी ने आउटसोर्सिंग एजेंसियों को तीन दिनों के भीतर समस्या का समाधान करने का निर्देश दिया था और ऐसा न करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद शिवा प्रोटेक्शन फोर्स, बालाजी डिटेक्टिव फोर्स, कमांडो इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स, बिरसा सिक्योरिटी एंड सर्विस सेटलमेंट और बीएमआर सिक्योरिटी सर्विस प्राइवेट लिमिटेड जैसी एजेंसियों ने आदेश का पालन नहीं किया। एसोसिएशन का आरोप है कि ये एजेंसियां कर्मियों का शोषण कर सरकार को बदनाम कर रही हैं।
वेतन में भारी कटौती और महीनों का बकाया
आंदोलन कर रहे कर्मियों ने बताया कि सरकार द्वारा निर्धारित मानदेय और एजेंसियों द्वारा किए जा रहे वास्तविक भुगतान में जमीन-आसमान का अंतर है। जहां सरकार लैब टेक्नीशियन, नर्स, ड्रेसर, ड्राइवर और कंप्यूटर ऑपरेटर के लिए 20,107.75 रुपये देती है, वहीं एजेंसियां उन्हें महज 12,400 से 13,000 रुपये ही दे रही हैं। सबसे बदतर स्थिति सफाई कर्मियों और लाउंड्री वर्करों की है, जिन्हें 14,440 रुपये के बदले सिर्फ 6,700 रुपये का भुगतान किया जा रहा है। इसके अलावा कर्मियों का 8 से 12 महीने तक का वेतन बकाया है।
स्वास्थ्य कर्मियों की प्रमुख मांगें:
* सभी आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मियों को हर महीने 1 से 10 तारीख के बीच अनिवार्य रूप से वेतन का भुगतान किया जाए।
* अलग-अलग विभागों के कर्मियों का बकाया 8, 9, 11 और 12 महीने का वेतन तुरंत रिलीज किया जाए।
* ईपीएफ , ईएसआईसी और बोनस में की जा रही अनियमितताओं को दूर कर उसका भुगतान सुनिश्चित हो।
* न्यूनतम मजदूरी दर के नियमों के तहत ट्रेजरी बिल के आधार पर भुगतान किया जाए, जिससे कर्मियों के वेतन में बढ़ोतरी हो सके।
* श्रम अधिनियम के तहत मिलने वाले सभी अवकाश और छुट्टियां कर्मियों को दी जाएं।
एसोसिएशन ने एकजुटता दिखाते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी तरह मान नहीं ली जातीं, तब तक स्वास्थ्य सेवाओं को ठप रख कर यह आंदोलन इसी तरह आगे बढ़ता रहेगा।



