प्याज, तेल, चावल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों ने बिगड़ा रसोई का बजट
नई दिल्ली । प्याज, खाद्य तेल, चावल और रसोई गैस (एलपीजी) की बढ़ती कीमतों के कारण शाकाहारी थाली की लागत में सालाना आधार पर 10 फीसदी का इजाफा हुआ है। अब एक शाकाहारी थाली 30.80 रुपए की लागत आती है, जबकि एक साल पहले यह खर्च 28.10 रुपए था। मांसाहारी थाली भी 6 फीसदी महंगी होकर 59.50 रुपए हो गई है, जो सितंबर 2025 में 56 रुपए थी, जिससे आम परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है।
एक रिपोर्ट बताती है कि अगस्त की तुलना में सितंबर में शाकाहारी थाली 4 फीसदी और मांसाहारी थाली 3 फीसदी अधिक महंगी हुई। शाकाहारी थाली का खर्च बढ़ने के पीछे प्याज की कीमतें सबसे बड़ी वजह रही हैं। सितंबर में प्याज की कीमत सालाना आधार पर करीब 89 फीसदी बढ़कर 53 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई, जो एक साल पहले 28 रुपए प्रति किलोग्राम थी। रिपोर्ट के मुताबिक रबी फसल के सीमित भंडार और उत्पादन में 5 से 6 फीसदी की गिरावट के साथ-साथ जून में सामान्य औसत से 40 फीसदी कम बारिश ने खरीफ फसल की बुवाई और नई उपज की आवक में देरी की, जिससे बाजार में प्याज की उपलब्धता प्रभावित हुई।
प्याज के अलावा अन्य आवश्यक वस्तुओं की महंगाई ने भी घरेलू बजट बिगाड़ दिया है। सितंबर में खाद्य तेल की कीमतें एक साल पहले के मुकाबले 12 फीसदी बढ़ीं, जबकि चावल 8 फीसदी और एलपीजी की कीमत 10 फीसदी ज्यादा रही। खाद्य तेल की महंगाई के पीछे वैश्विक अनिश्चितताएं और पाम ऑयल उत्पादन पर अल नीनो के संभावित प्रभाव को प्रमुख कारण बताया गया है। वहीं, चावल की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे धान के रकबे और पैदावार में संभावित कमी की आशंका व्यक्त की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर के शुरुआती दिनों में त्योहारों की मांग और प्याज की सीमित आपूर्ति से कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि, महीने के अंत तक खरीफ की नई फसल बाजार में पहुंचने से प्याज के दाम में धीरे-धीरे नरमी आने की उम्मीद है। फिलहाल, आम परिवारों के लिए रसोई का खर्च संभालना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, और आने वाले दिनों में खाद्य पदार्थों की उपलब्धता व बाजार में कीमतों का रुख ही तय करेगा कि घरेलू बजट को कितनी राहत मिल पाती है।


