जबलपुर । “योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि एक सदाबहार जीवन शैली है। यह उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर शरीर और मन को स्वस्थ रखने का अचूक माध्यम है। मानवता के लिए भारत की सबसे बड़ी विरासत योग है, जिसे हमें अपने दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना चाहिए।” यह बात राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर मध्य प्रदेश के जबलपुर में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह को संबोधित करते हुए कही।
रविवार को सदर स्थित गैरिसन ग्राउंड में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम “याेगा फाॅर हेल्दी एजिंग यानी स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग” रखी गई है । राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में योग को स्वस्थ, संतुलित और दीर्घायु जीवन का आधार बताते हुए कहा कि यह भारत की ऐसी अमूल्य धरोहर है, जिसने आज पूरी दुनिया को स्वास्थ्य और शांति का मार्ग दिखाया है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि मां नर्मदा की पावन नगरी जबलपुर आकर वह स्वयं को धन्य महसूस कर रही हैं। उन्होंने कहा कि योग भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा की वह धरोहर है, जिसने सीमाओं और भाषाओं से ऊपर उठकर पूरी मानवता को जोड़ने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस आज वैश्विक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है और दुनिया के अनेक देशों में बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने लोगों से आह्वान किया कि योग को केवल 21 जून तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि नियमित योगाभ्यास व्यक्ति को शारीरिक रूप से स्वस्थ, मानसिक रूप से संतुलित और भावनात्मक रूप से सशक्त बनाता है। विशेष रूप से बढ़ती उम्र में योग शरीर की कार्यक्षमता बनाए रखने और जीवन की गुणवत्ता बेहतर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


