नई दिल्ली । दिल्ली में विपक्षी गठबंधन द्वारा सोमवार को आयोजित भव्य लोकतंत्र मार्च के बाद दिल्ली पुलिस ने दो और प्राथमिकियां दर्ज की हैं। यह मार्च मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और वोट चोरी तथा मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर निकाला गया था। दिल्ली पुलिस सूत्रों के अनुसार, ये एफआईआर बाराखम्बा पुलिस स्टेशन और तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई हैं। हालांकि, अभी तक इन प्राथमिकियों में लगाई गई धाराओं, आरोपों और नामजद नेताओं के बारे में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस फिलहाल मामले की गहन जांच कर रही है। गठबंधन के घटक दलों ने बीते सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च कर अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया था। इस लोकतंत्र मार्च में विपक्षी दलों के कई वरिष्ठ नेता, कार्यकर्ता और नागरिक संस्थाओं के सदस्य भारी संख्या में शामिल हुए थे। मध्य दिल्ली के कनॉट प्लेस से शुरू हुए इस मार्च में लोगों की भारी भीड़ झंडे और पोस्टर लिए चल रही थी।
इस मार्च का नेतृत्व लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने किया। उनके साथ समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, भाकपा के डी. राजा, माकपा नेता एम.ए. बेबी, राजद के तेजस्वी यादव और राकांपा (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले जैसे प्रमुख नेता भी मौजूद थे। बाराखंबा रोड से होते हुए ये नेता भगवान दास रोड पर लगे पुलिस अवरोधकों को पार कर उच्चतम न्यायालय पहुंचे। यहां विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने और अन्य कथित अनियमितताओं को लेकर एक संयुक्त याचिका दायर की। इस याचिका में भारत निर्वाचन आयोग, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधु तथा विवेक जोशी को भी पक्षकार बनाया गया है। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद अब पुलिस की कार्रवाई और जांच पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।


