रांची: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर आपको मिलवा रहे हैं रांची की आदिवासी महिला उद्यमी समीक्षा बिलुंग से, जिन्होंने अपने जुनून और मेहनत के दम पर फूड बिजनेस में अपनी अलग पहचान बनाई है। एक साधारण परिवार से आने वाली समीक्षा आज न सिर्फ अपना रेस्टोरेंट चला रही हैं, बल्कि करीब 20 लोगों को रोजगार भी दे रही हैं। आदिवासी महिला उद्यमी समीक्षा बिलुंग की कहानी कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है। सिमडेगा से संबंध रखने वाली समीक्षा आज रांची में अपना रेस्टोरेंट “द लोकल ईट्री” सफलतापूर्वक चला रही हैं। खास बात यह है कि उनके इस बिजनेस से करीब 20 लोगों को रोजगार भी मिला है।
समीक्षा बताती हैं कि उनकी शुरुआती पढ़ाई रांची में हुई। इसके बाद उन्होंने बेंगलुरु से ग्रेजुएशन किया और फिर रांची लौटकर एक्सआईएसएस से एमबीए पूरा किया। कुकिंग का शौक उन्हें बचपन से ही था। इसी शौक ने उन्हें फूड बिजनेस की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि 2018 में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने घर के किचन से एक क्लाउड किचन शुरू किया था। वहां वे अपनी कजिन के साथ मिलकर खासतौर पर तिब्बती डिशेज बनाती थीं। लोगों का रिस्पॉन्स अच्छा मिला, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा। इसके बाद उन्होंने रांची में अपना रेस्टोरेंट शुरू किया, जिसे अब तीन साल हो चुके हैं।
समीक्षा कहती हैं कि एक आदिवासी महिला के रूप में बिजनेस शुरू करना आसान नहीं था। शुरुआत में कई लोगों को विश्वास नहीं होता था कि वह खुद इस बिजनेस को चला रही हैं। अक्सर लोग उनसे कहते थे कि “बॉस से बात करवा दीजिए”, तब उन्हें बताना पड़ता था कि वही इस रेस्टोरेंट की मालिक हैं।
उन्होंने कहा कि रेस्टोरेंट खोलने के लिए उन्हें काफी रिसर्च करनी पड़ी। फाइनेंस, एम्प्लॉई मैनेजमेंट और बिजनेस संचालन से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बिजनेस शुरू करने के लिए उन्होंने लोन भी लिया, जिसे चुकाते हुए काम को आगे बढ़ाया।
समीक्षा के अनुसार, उनके माता-पिता उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा हैं। उनका मानना है कि किसी भी लड़की को दिया जाने वाला सबसे बड़ा उपहार शिक्षा है। अगर बेटियों को अच्छी शिक्षा मिले, तो वे हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं।
वह समय-समय पर अपने रेस्टोरेंट में छोटे कार्यक्रम और कार्निवल भी आयोजित करती हैं, जहां आदिवासी कलाकार और छोटे उद्यमी अपने उत्पादों के स्टॉल लगा सकें। इससे उन्हें अपने काम को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है।
समीक्षा का कहना है कि आदिवासी क्षेत्रों की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए आगे आना चाहिए। उनका मानना है कि चाहे छोटा ही काम क्यों न हो, लेकिन महिलाएं अगर अपना व्यवसाय शुरू करें तो इससे उनका आत्मविश्वास और आर्थिक स्थिति दोनों मजबूत होगी।
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