इसरो के अत्याधुनिक इनसेट-3डीएस ने भारत के आसमान से अद्भुत दृश्य किया कैद
नई दिल्ली । भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अत्याधुनिक मौसम सैटेलाइट इनसेट-3डीएस ने भारत के आसमान से एक अद्भुत दृश्य कैद किया है। शुक्रवार को ली गई इस सैटेलाइट तस्वीर में भारतीय उपमहाद्वीप का मौसम साफ तौर पर दो हिस्सों में बंटा नजर आया। देश का पूर्वी और दक्षिणी भाग जहां घने बादलों के आगोश में है, वहीं पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी हिस्से में आसमान पूरी तरह साफ दिख रहा है। तस्वीर में भारतीय उपमहाद्वीप के ऊपर वायुमंडलीय स्थितियों में एक अनोखा बंटवारा दिख रहा है। इसमें पूर्वी भारत, बंगाल की खाड़ी और आस-पास के इलाकों में बड़े पैमाने पर बादल बने हुए दिखाई दे रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 10.83 माइक्रोमीटर की वेवलेंथ वाले थर्मल इन्फ्रारेड चैनल का इस्तेमाल करके ली गई यह सैटेलाइट तस्वीर भारत और पड़ोसी देशों में बादलों के फैलाव को दिखाती है। इसकी सबसे खास बात बादलों का एक बड़ा और चमकदार समूह है जो बंगाल की खाड़ी से लेकर पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत तक फैला है। इसके अलावा, दक्षिणी प्रायद्वीप और आस-पास के समुद्री इलाकों में भी बादलों की पट्टियां दिखाई दे रही हैं। इसके उलट, पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी भारत का ज्यादातर हिस्सा बादलों से मुक्त दिख रहा है, जिससे इन दोनों इलाकों के बीच साफ तौर पर एक अंतर दिखाई दे रहा है।
यह तस्वीर उस समय की स्थिति दिखाती है जब दक्षिण-पश्चिम मॉनसून भारत के कुछ हिस्सों से लौटने की प्रक्रिया में है, जबकि वायुमंडलीय सिस्टम अलग-अलग इलाकों में बारिश पर असर डाल रहे हैं। पूर्वी भारत और बंगाल की खाड़ी के ऊपर बादलों के बनने का संबंध नमी वाली हवाओं, कम दबाव वाले सिस्टम और अन्य वायुमंडलीय हलचलों से हो सकता है। सिर्फ़ सैटेलाइट तस्वीर से यह पक्का नहीं किया जा सकता कि इस पैटर्न के लिए कौन सा मौसम सिस्टम जिम्मेदार है। इनसेट-3डीएस सैटेलाइट भारत के मौसम संबंधी सैटेलाइट प्रोग्राम का हिस्सा है और यह बादलों, वायुमंडलीय तापमान, नमी और मौसम से जुड़े अन्य पैमानों की जानकारी देता है। इसका थर्मल इन्फ्रारेड इंस्ट्रूमेंट पृथ्वी और वायुमंडल से निकलने वाले रेडिएशन का पता लगाता है, जिससे मौसम वैज्ञानिक रात में भी बादलों के पैटर्न को देख पाते हैं। इस तस्वीर से पता चलता है कि भारत में बादलों की स्थिति में कितना बड़ा अंतर हो सकता है, क्योंकि अलग-अलग वायुमंडलीय स्थितियां देश के मौसम पर असर डालती हैं।


