नई दिल्ली । उच्चतम न्यायालय ने झारखंड उच्च न्यायालय में एक मामले की सुनवाई के दौरान एक वकील के व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए उच्च न्यायालय से माफी मांगने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता माफी मांगना चाहते हैं तो माफी मांगें। अगर आप जजों को आंख दिखाना चाहते हैं, तो दिखाएं। हम भी यहां बैठे हैं और फिर हम भी देख लेंगे।
हालांकि, उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय से कहा कि अगर वकील माफी मांग लेते हैं, तो उनके प्रति सहानुभूति रखी जाए। दरअसल, झारखंड के वकील महेश तिवारी झारखंड उच्च न्यायालय में एक विधवा का केस लड़ रहे थे, जिनका 1.30 लाख से ज्यादा बकाया होने की वजह से बिजली का कनेक्शन काट दिया गया था।
झारखंड उच्च न्यायालय में मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस राजेश कुमार ने राज्य के बार काउंसिल के अध्यक्ष से वकील के काम करने के तरीके पर संज्ञान लेने के लिए कहा। इस पर महेश तिवारी उठे और जस्टिस कुमार से कहा कि मैं अपनी तरह से बहस कर सकता हूं, आप जो कह रहे हैं उस तरीके से नहीं। किसी भी वकील को अपमानित करने की कोशिश नहीं करें।
इस पर जस्टिस कुमार ने कहा कि आप यह नहीं कह सकते हैं कि कोर्ट ने अन्याय किया है। तब वकील तिवारी ने कहा कि क्या मैंने कहा ऐसा। उन्होंने कोर्ट से लाइव वीडियो रिकॉर्डिंग की जांच के लिए कहा। वकील ने कहा कि आप जिसके बारे में कह रहे हैं वो दूसरे वकील थे, जिन्होंने उस वाक्य का इस्तेमाल किया। इस पर कोर्ट को आपत्ति हुई।
इसके बाद झारखंड उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने वकील तिवारी के खिलाफ अवमानना का नोटिस जारी किया। इसी नोटिस को चुनौती देते हुए वकील तिवारी ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।
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