नई दिल्ली । लंबे समय तक तिहाड़ जेल में रहे उद्योगपति सुब्रत रॉय सहारा ने तेहाड़ जेल में भरपूर ऐशोआराम किए। उन्हे जहां लक्सीरियस सुविधाएं मिलती थीं वहीं एयर होस्टेस के आने जाने पर कोई रोक नहीं थी। इस मामले की शिकायत तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से की कई तो उसके विपरीत शिकायतकर्ता को ही प्रताड़ित किया जाने लगा। इस तरह के खुलासे तिहाड़ जेल के पूर्व अधीक्षक सुनील गुप्ता ने अपने अलग अलग इंटरव्यू में किए हैं।
सुनील गुप्ता ने सुब्रत रॉय को तिहाड़ जेल में मिली सुविधाओं का खुलासा करते हुए कहा, सुब्रत रॉय सहारा को जेल में नहीं रखा हुआ था, उनको कोर्ट कॉमपलेक्स में रखा गया था। उन्हें काफी सारा पैसा अपने निवेशकों को वापस करना था। सुब्रत रॉय ने कोर्ट को कहा था कि मुझे अपनी संपत्तियां बेचनी पड़ेगी और मेरे ज्यादातर खरीदार यूरोप अथवा पश्चिमी देशों में हैं। सुब्रत रॉय ने कोर्ट से कहा था कि मुझे ऐसी जगह पर रखा जाए जहां मैं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये अपने खरीदारों से बात कर सकूं।गुप्ता ने कहा, जब एयर होस्टेस आ रही है तो वो किस काम के लिए आ रही है, बदल-बदल कर एयर होस्टेस आ रही हैं, दिन में दो बार, तीन बार आ रही हैं। तो वो किस लिए आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि वो इन जानकारियों को मिलने के बाद काफी विचलित हुए और दिल्ली के तत्कालीन केजरीवाल ने दिया चौंकाने वाला जवाब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पास गए। और कहा कि जेल प्रशासन की मिलीभगत से सुब्रत रॉय को ये सुविधाएं मिल रही हैं। अरविंद केजरीवाल ने जेल मंत्री को बुलाया। जेल मंत्री भी उनके पास थे। इस पर केजरीवाल का कहना था- देखो सुनील। हमें पता है कि जो तिहाड़ का डायरेक्टर जनरल है काफी करप्ट है, पर इसमें फंस जाएगा सुपरिंटेंडेंट जेल, अगर हम जाकर छापा मारते भी हैं रात को तो सुपरिंटेंडेंट जेल फंस जाएगा। वो जो कुछ कर रहा है डायरेक्टर जनरल के कहने से कर रहा है।इस पर सुनील गुप्ता ने केजरीवाल को कहा कि, अगर सुपरिंटेंडेंट जेल फंसेगा तो वह खुद बताएगा कि वो किसके कहने पर ऐसा कर रहा है, कानून तो वो तोड़ ही रहा है। मेरे कहने पर कोई एक्शन नहीं लिया गया। सुनील गुप्ता ने कहा कि ऐसा लगभग छह महीने तक चलता रहा, लड़कियां आती रहीं। मैं परेशान था और केजरीवाल के पास गया। इसका हर्जाना मुझे भरना पड़ा मैं जिस हफ्ते रिटायर हो रहा था उसी हफ्ते मुझ पर चार्जशीट दायर किया गया। ये होता है हिन्दुस्तान में। ये चार्जशीट वित्तीय अनियमितता का था।
15 पन्नों का आरोप पत्र
सुनील गुप्ता ने बताया कि, आखिरकार कुछ भी ठोस नहीं किया गया। वह (सुब्रत रॉय सहारा) सुविधाओं का आनंद लेते रहे। जेल प्रशासन उनके सामने झुक गया। फिर उन्होंने मुझे परेशान करना शुरू कर दिया। मैं तत्कालीन उपराज्यपाल से मिला। उन्होंने मुझे अपने सचिव से बात करने को कहा, मैंने ऐसा किया और उन्हें सब कुछ समझाया। लेकिन मेरी कही गई किसी भी बात पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। जब मैं सेवानिवृत्त हो रहा था, तो मुझे 10 साल पुराने वित्तीय अनियमितताओं के संबंध में 15 पन्नों का आरोपपत्र दिया गया। यह सिर्फ परेशान करने के लिए था। मुझे चार-पांच साल बाद दोषमुक्त कर दिया गया और सरकार ने आरोपपत्र वापस ले लिया। लेकिन मैं उन 5 सालों में बहुत परेशान था। मुझे पता था कि ऐसा होगा।


