रांची: बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सदन में झारखंड में अंगदान पर अलग कानून बनाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार राज्य में अंगदान को लेकर अपना अलग और प्रभावी कानून बनाएगी। केंद्र स्तर पर कानून मौजूद होने के बावजूद जमीनी स्तर पर अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में राज्य सरकार ठोस पहल कर नई व्यवस्था लागू करेगी, ताकि जरूरतमंद मरीजों को समय पर जीवनदान मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल कानूनी प्रावधान पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि अंगदान को लेकर व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने और अधिक से अधिक लोगों को इस पुनीत कार्य के लिए प्रेरित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
10 माह की बच्ची की घटना का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने एक मार्मिक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि 10 माह की एक बच्ची के माता-पिता ने उसकी मृत्यु के बाद उसके अंग दान कर मानवता की मिसाल पेश की।
उन्होंने कहा कि जब किसी की जान बचाने की बात आती है, तो धर्म और जाति की सीमाएं समाप्त हो जाती हैं। अंगदान इंसानियत का सर्वोच्च उदाहरण है, जहां केवल जीवन बचाना ही उद्देश्य होता है। ऐसी घटनाएं समाज को प्रेरित करती हैं और सरकार का दायित्व है कि वह अंगदान की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाए।
2050 तक अग्रणी राज्य बनाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार वर्ष 2050 तक झारखंड को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लक्ष्य के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य की विकास यात्रा को कोई बाधित नहीं कर सकता।
अंगदान पर प्रस्तावित नया कानून इसी व्यापक दृष्टि का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य संवेदनशील, जागरूक और सशक्त समाज का निर्माण करना है।
विपक्ष पर कटाक्ष, लोकतंत्र की दुहाई
मुख्यमंत्री ने संसदीय परंपराओं का जिक्र करते हुए कहा कि झारखंड विधानसभा में लोकतांत्रिक मूल्यों का पूरा सम्मान किया जाता है। विपक्ष को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिलता है, जो राज्य की मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था को दर्शाता है।


