कोलकाता । अंटार्कटिका में स्थित थ्वाइट्स ग्लेशियर के तेजी से पिघलने से दुनिया के समुद्रों का जलस्तर बढ़ने का खतरा बढ़ गया है। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों और नासा की जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी के शोधकर्ताओं के नए अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2100 तक यह ग्लेशियर वैश्विक समुद्र स्तर में लगभग 30 मिलीमीटर यानी 1.2 इंच की वृद्धि कर सकता है। यह अनुमान पहले के आकलनों से लगभग दोगुना है।
एशिया के पांच बड़े शहरों पर संकट
समुद्र का जलस्तर बढ़ने से एशिया के कई तटीय शहरों और नदी डेल्टा क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। इनमें भारत का कोलकाता, चीन का शंघाई, बांग्लादेश की राजधानी ढाका, थाईलैंड का बैंकॉक और फिलीपींस की राजधानी मनीला प्रमुख हैं। इन शहरों में बड़ी आबादी रहती है। समुद्र के बढ़ते जलस्तर से निचले इलाकों में जलभराव, तटीय कटाव और बाढ़ की समस्या गंभीर हो सकती है।
गर्म समुद्री पानी से तेजी से पिघल रही बर्फ
शोधकर्ताओं के मुताबिक, थ्वाइट्स ग्लेशियर के निचले हिस्से में गर्म समुद्री पानी पहुंचने से बर्फ तेजी से पिघल रही है। ग्लेशियर के समुद्र से जुड़े आधार क्षेत्र में होने वाली इस प्रक्रिया से बर्फ तेजी के साथ पिघलना शुरू हो गई है। वैज्ञानिकों ने आशंका जताई है, ग्लेशियर का समुद्र तल पर मौजूद सहारा कमजोर पड़ने से ग्लेशियर तेजी से पिघल रहा है।
हालांकि, रिपोर्ट का अर्थ यह नहीं है, कि उक्त शहर वर्ष 2100 तक पूरी तरह समुद्र में डूब जाएंगे। यह अध्ययन समुद्र के जलस्तर में वृद्धि और उससे जुड़े संभावित खतरों के प्रति एक चेतावनी है।
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