डॉ सुनील सिंह अपनी सेवा काल के दौरान से ही लेखन का कार्य में लग रहे, विभागीय पुस्तकें ही नहीं बल्कि कई सामाजिक ,ऐतिहासिक विषयों पर रहा है विशेष जोर: आयुक्त
जीवन को नया आयाम देने का आधार है पुस्तक लेखन, रिटायर्ड आईएएस डॉ सुनील कुमार सिंह है ऑफिसर के लिए प्रेरणा स्रोत:डीसी
दुमका ब्यूरो
दुमका। रिटायर्ड आईएएस अधिकारी डॉक्टर सुनील कुमार सिंह द्वारा लिखित ‘संथाल परगना का इतिहास’ पुस्तक का प्रमंडलीय आयुक्त लालचंद डाडेल, डीसी आजनेयुलू डोडे, डीडीसी अभिजीत प्रसाद, ट्रेनी आईएएस, आयुक्त के सचिव अमित कुमार, डॉ. सुनील कुमार सिंह के साथ क्राउन पब्लिकेशन के राजेन्द्र कुमार आर्य ने
शनिवार को राजकीय पुस्तकालय में संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर विधिवत रूप से पुस्तक का विमोचन किया।
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संथाल परगना के सभी पहलु डॉ सुनील सिंह की पुस्तक में है मौजूद
आयुक्त ने कहा कि डॉ सुनील सिंह अपनी सेवा काल के दौरान से ही लेखन का कार्य करते रहे हैं ,इन्होंने विभागीय पुस्तकें ही नहीं बल्कि कई सामाजिक ,ऐतिहासिक विषयों पर भी पुस्तक लिखी हैं। संथाल परगना के पुरातन परिवेश, इतिहास ,संस्कृति, सभ्यता का वर्णन उनकी पुस्तकों में है जो प्रशंसनीय है। वर्तमान में जो ग्रन्थ उपलब्ध है, वे उस क्षेत्र के आंशिक क्षेत्र या आंशिक अवधि पर लिखित हैं। एक सम्पूर्ण इतिहास हिन्दी में उपलब्ध नहीं है। अंग्रेजों द्वारा लिखित गजेटियर में संक्षिप्त जानकारी उपलब्ध है। इस पुस्तक में संथाल परगना की स्वायत्तता आंदोलन को छोड़कर प्राचीन काल से स्वतंत्रता काल तक के इतिहास को शामिल किया गया है। यह तेरह अध्यायों में विभाजित है। प्रथम तीन अध्याय प्राचीन, मध्य कालीन और ब्रिटिश कालीन इतिहास का वर्णन करते हैं। यह पहली बार है जब संथाल परगना के सभी पहलुओं का विवरण एक जगह पर डा० सिंह ने किया है जिससे न केवल छात्राओं, शोधकर्ताओं बल्कि प्रशासकों को भी काफी ज्ञानकारी मिल सकती है।
सेवानिवृत्ति के बाद भी समाज को दें अपने अनुभव का लाभ, इसे जीवन को मिलेगा नया अयाम
डीसी आजनेयुलू डोडे ने कहा कि काम करने के दौरान रिटायर्ड आईएएस डॉक्टर सुनील कुमार ने जो रिसर्च को एक जगह संग्रह कर पुस्तक में तब्दील किया यह हम लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत है। सेवा में रहकर लेखनी करना काफी चुनौती पूर्ण कार्य है। यह पुस्तक छात्रों, ऑफिसर,और आने वाले नए ऑफीसरों के लिए मार्गदर्शन का काम करेगा ।अपनी सरकारी सेवा पूरी करने के बाद आज अपना वक्त ,समय पुस्तक लिखने के काम में लगा रहे हैं इससे बेहतर काम और क्या हो सकता है ।हम सबों को प्रेरणा प्रदान कर रहे हैं । इन्होंने अपने साहित्य के माध्यम से समाज को बहुत कुछ देने का काम किया है। आईएएस ऑफिसर जब तक पद पर रहते हैं तब तक तो सामाजिक रूप से मान्यता मिलती है लेकिन पुस्तक लेखन के माध्यम से ता उम्र सामाजिक मान्यता मिलती है।
पुस्तक में संताल परगना की प्राचीन इतिहास व संस्कृति का है समावेश
डॉक्टर सुनील कुमार सिंह ने कहा कि संथाल परगना में मैंने अपने पदस्थापन के दौरान संताल परगना के ऐतिहासिक चीजों पर जाना, अध्ययन किया और स्थल जाकर साक्ष्य के आधार पर पुस्तक लिखी। इस पुस्तक में प्राचीन इतिहास से लेकर आधुनिक इतिहास का वर्णन है। संथाल परगना की प्राचीन इतिहास के साथ-साथ संथाल विद्रोह 1857 का क्रांति, भारत छोड़ो आंदोलन की चर्चा इस पुस्तक में है ।
संताल परगना की संस्कृति का समावेश इस पुस्तक में की गई है। ईसाई मिशनरियों का संथाल समाज में क्या भूमिका रही, इसका भी वर्णन है। उन्होंने कहा सिविल सर्विस की परीक्षा की तैयारी करने वाले जो छात्र झारखंड से आते है, उन्हें साक्षात्कार में झारखंड के बारे में जानने के लिए यह पुस्तक काफी उनके लिए उपयोगी होगा।
रिटायर्ड आईएएस डॉ सुनील कुमार सिंह ने लिखी है सामाजिक सरोकारों से जुड़ी कई पुस्तक
पुस्तक के लेखक डॉ० सुनील कुमार सिंह है जो सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं। इन्होंने राजस्व पर और राज्य के अन्य विषयों पर कई पुस्तकें लिखीं हैं। इस ग्रन्थ के प्रकाशक ‘क्राउन पब्लिकेशन्स’ है। इस पुस्तक में कुल 426 पृष्ट है और इसका मूल्य 900 रू. है। समारोह का संचालन अशोक कुमार सिंह ने किया । वहीं धन्यवाद ज्ञापन फिरदोसी ने कई । मौके पर आयुक्त के सचिव अमित कुमार, जनसंपर्क विभाग के उपनिदेशक सहित सैकड़ों छात्र, मीडिया कर्मी, प्रमुख नागरिक रहे मौजूद ।


