नई दिल्ली । आयुर्वेद के महान ग्रंथ चरक संहिता में हल्दी को ‘हरिद्र’ कहा गया है और इसे बेहतरीन औषधियों में गिना गया है। हल्दी में करक्यूमिन नामक सक्रिय तत्व पाया जाता है, जो सूजन कम करने, शरीर से विषैले तत्वों को निकालने और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद करता है। हल्दी वाला दूध एक ऐसा पारंपरिक घरेलू नुस्खा है जिसे आयुर्वेद में बेहद गुणकारी माना गया है। दूसरी ओर, दूध को आयुर्वेद में ओज यानी शरीर की मूल ऊर्जा को बढ़ाने वाला बताया गया है। जब हल्दी और दूध को एक साथ मिलाकर सेवन किया जाता है, तो यह त्रिदोष यानी वात, पित्त और कफ को संतुलित करता है, जिससे शरीर और मन दोनों स्वस्थ रहते हैं।
अगर किसी को नींद न आने की शिकायत है, तो हल्दी वाला दूध एक रामबाण इलाज साबित हो सकता है। इसमें मौजूद ट्रिप्टोफान नामक अमीनो एसिड मस्तिष्क को शांत करता है, जिससे गहरी नींद आती है। यह शरीर के इम्यून सिस्टम को भी मजबूती देता है और सामान्य सर्दी-जुकाम, खांसी और गले की खराश जैसी समस्याओं में राहत पहुंचाता है। दूध में पाए जाने वाले कैल्शियम और हल्दी के सूजन-नाशक गुण मिलकर हड्डियों और जोड़ों को ताकत देते हैं। विशेषकर गठिया, कमर दर्द या जोड़ों में सूजन से परेशान लोगों के लिए यह बहुत फायदेमंद माना गया है। हल्दी वाला दूध त्वचा की समस्याओं में भी असरदार होता है क्योंकि हल्दी खून को शुद्ध करती है।मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद से पीड़ित लोगों के लिए भी यह एक प्राकृतिक सहारा है, क्योंकि यह शरीर में सेरोटोनिन और डोपामिन जैसे हार्मोन को संतुलित करता है।
महिलाओं के लिए यह पीरियड्स के दौरान होने वाली ऐंठन और हार्मोनल असंतुलन को नियंत्रित करने में भी मदद करता है। रात को सोने से लगभग 30 मिनट पहले इसका सेवन करना सबसे लाभकारी माना गया है। मुंहासे, खुजली या फोड़े-फुंसी जैसी परेशानियों में यह लाभ पहुंचाता है। इसके नियमित सेवन से पाचन तंत्र मजबूत होता है क्योंकि हल्दी लिवर को डिटॉक्स करती है और पाचन क्रिया को बेहतर बनाती है। इससे गैस, कब्ज और एसिडिटी में भी राहत मिलती है।
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