नोएडा । दिल्ली से सटे औद्योगिक केंद्र नोएडा के फेज 2 इलाके में सोमवार को स्थिति तब बेकाबू हो गई, जब हजारों मजदूरों का आक्रोश हिंसक झड़पों में बदल गया। होजरी कॉम्प्लेक्स और नोएडा स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन के मज़दूरों ने व्यवस्थागत शोषण के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सड़कों पर जमकर प्रदर्शन किया, जिसके चलते तीखी झड़प हुई।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह प्रदर्शन जो बेहतर वेतन के लिए धरने के रूप में शुरू हुआ था, तब एक हिंसक मोड़ ले लिया जब प्रदर्शनकारियों ने पथराव कर दिया और निजी वाहनों और फैक्ट्री की संपत्ति में तोड़फोड़ की। पुलिस की बड़ी टुकड़ियों को मौके पर तैनात किया गया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। हिंसा प्रभावित इलाकों में पीएसी की टुकड़ियों को भी तैनात किया गया है। इस अशांति की जड़ें काम करने की स्थितियों और रुके हुए वेतन को लेकर गहरी निराशा में छिपी हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक कई कर्मचारी हर दिन 10 घंटे से ज़्यादा शारीरिक श्रम करते हैं, फिर भी उनका मासिक वेतन 12,000 से 15,000 रुपए के बीच है। यह गुस्सा इस आरोप से और भी भड़क गया है कि जिला प्रशासन और श्रम विभाग ने इन उल्लंघनों पर आंखें मूंद रखी हैं। बढ़ती महंगाई को देखते हुए मूल वेतन में तत्काल बढ़ोतरी की जाए, और मौजूदा वेतन सीमा से बाहर निकला जाए। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि फैक्ट्रियां उन कानूनी नियमों का पालन करें जिनके तहत ओवरटाइम के घंटों के लिए दोगुना वेतन देने का प्रावधान है।
मजदूरों का आरोप है कि फिलहाल उन्हें अतिरिक्त शिफ्टों के लिए एकल दर पर ही भुगतान किया जाता है और वह भी तब, जब उन्हें भुगतान किया जाए। जबरदस्ती 10 से 12 घंटे काम कराने की प्रथा को खत्म किया जाए और यह तय किया जाए कि 8 घंटे से ज़्यादा काम करना पूरी तरह से स्वैच्छिक हो और उसके लिए उचित भुगतान किया जाए। उनकी अन्य मांगों में बोनस, साप्ताहिक अवकाश, शिकायत निवारण प्रकोष्ठ, समय पर वेतन और वेतन पर्ची उपलब्ध कराना शामिल है।
रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल पुलिस और प्रशासन मज़दूरों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर शांति बहाल करने की कोशिश कर रहे हैं। नोएडा के औद्योगिक इलाकों में तनाव है और कई फैक्ट्रियों में काम पूरी तरह ठप है। प्रशासन के लिए अब चुनौती यह है कि वह औद्योगिक शांति और मजदूरों के अधिकारों के बीच संतुलन कैसे बनाता है।


