गरीबों के न्याय और बुनियादी सुविधाओं पर काम करने की कही बात
रांची । ओडिशा के नवनियुक्त राज्यपाल ब्रज मोहन राम के एक बयान को लेकर राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है। रांची में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि ओडिशा में अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय की स्थिति को समझने के साथ लोगों को भाजपा के संगठन से जोड़ने के प्रयास करेंगे। उन्होंने भाजपा के प्रति अपनी निष्ठा और पार्टी में लंबे समय तक किए गए संगठनात्मक कार्यों का भी उल्लेख किया।
रांची के मोरहाबादी स्थित हनुमान मंदिर में परिवार के साथ पूजा-अर्चना करने के बाद राम ने कहा कि भाजपा ने एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में उनके परिश्रम और निरंतर प्रयासों को मान्यता दी है। उन्होंने बताया कि तीन बार टिकट नहीं मिलने के बावजूद वे पार्टी के साथ बने रहे और भाजपा प्रत्याशियों की जीत के लिए काम करते रहे।
राम ने कहा कि कई बार चुनाव का टिकट नहीं मिलने पर नेता दूसरी पार्टियों में चले जाते हैं, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्हें उम्मीद थी कि पार्टी उनके काम पर ध्यान देगी। उन्होंने इस नियुक्ति का श्रेय माता रानी की कृपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आशीर्वाद को दिया।
ओडिशा में अपनी भूमिका के बारे में उन्होंने कहा कि वहां अनुसूचित जाति समुदाय की स्थिति का जायजा लेंगे। उन्होंने भाजपा के एससी मोर्चा के संगठन को मजबूत करने और अधिक से अधिक लोगों को पार्टी से जोड़ने की बात कही। राम के अनुसार, वे करीब 20 वर्षों से झारखंड में भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चा के संगठनात्मक कार्यों से जुड़े रहे हैं।
नवनियुक्त राज्यपाल ने गरीबों के कल्याण और लोगों को न्याय दिलाने को अपनी प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि बुनियादी समस्याओं के समाधान, आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता और राज्य की खुशहाली के लिए काम करने का प्रयास करेंगे। ब्रज मोहन राम पलामू से तीन बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं। उनकी नियुक्ति और भाजपा के संगठनात्मक कार्यों को लेकर दिए गए बयान के बाद राज्यपाल पद की संवैधानिक मर्यादा को लेकर भी चर्चा हो रही है। राज्यपाल का पद संवैधानिक होता है और उससे जुड़ी जिम्मेदारियों का निर्वहन निष्पक्षता के साथ किया जाना अपेक्षित है।

