मुंबई । रतन टाटा ने अपनी संपत्ति को कोर्ट कचहरी के विवाद से बचाने के लिए अपनी वसीयत में नो कॉन्टैक्ट क्लास को जोड़ा है। वसीयत में इस क्लाज के होने के कारण जो भी व्यक्ति या संस्था वसीयत को चुनौती देगी। उसको टाटा की वसीयत मे मिले हक को खोना पड़ेगा। रतन टाटा ने अपनी वसीयत में अपनी हिस्सेदारी को बेचने और ट्रांसफर करने में प्रतिबंधित किया है। मुंबई हाईकोर्ट में रतन टाटा की यह वसीयत वैधानिकता को प्रमाणित करने के लिए पेश की गई है।
वसीयत के अनुसार रतन टाटा ने अपनी 3800 करोड रुपए की संपत्ति का बड़ा हिस्सा रतन टाटा एंडोमेंट फाउंडेशन, रतन टाटा एंडोमेंट ट्रस्ट को दान किया है। टाटा संस की हिस्सेदारी मे 3368 शेयर हैं। इसकी कीमत लगभग 1684 करोड रुपए है।
रतन टाटा ने अपनी वसीयत में अपनी सौतेली बहनों को लगभग 800 करोड रुपए का हिस्सा दिया है। वसीयत में एक तिहाई हिस्सा पूर्व टाटा कर्मचारी मोहिनी मोहन दत्ता को सोपा गया है। जो रतन टाटा के बहुत करीबी थे। इसके अलावा भी वसीयत में बहुत सारे लोगों को हक दिया गया है। रतन टाटा को अनुमान था, उनकी वसीयत को विवाद का विषय बनाया जाएगा। इससे बचने के लिए उन्होंने नो कॉन्टैक्ट क्लाज अपनी वसीयत में डलवाई थी।
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