नई दिल्ली । देश की राजनीति और संसद के भीतर आने वाले दिनों में सीटों का गणित पूरी तरह से बदलने जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में हुई बड़ी बगावत और हाल ही में 24 सीटों पर हुए राज्यसभा चुनावों के नतीजों का असर अब सीधे तौर पर संसद के दोनों सदनों पर दिखाई देने लगा है। रणनीतिक सूत्रों के अनुसार, राज्यसभा चुनावों के इस मौजूदा दौर के बाद सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) उच्च सदन में दो-तिहाई के जादुई और ऐतिहासिक आंकड़े के बेहद करीब पहुंच सकता है। हालांकि, लोकसभा में टीएमसी के बागी सांसदों के समर्थन के बावजूद एनडीए के लिए दो-तिहाई का आंकड़ा छूना अभी भी काफी दूर नजर आ रहा है।
वर्तमान में राज्यसभा के भीतर एनडीए के पास 148 सांसदों की संख्या है। माना जा रहा है कि झारखंड और मिजोरम की सीटों पर होने वाले चुनावों में एनडीए निर्दलीय सीटों पर जीत हासिल कर सकता है, जहां आगामी 18 जून को मतदान होना है। इसके अलावा, टीएमसी के चार राज्यसभा सांसदों के संभावित इस्तीफे के बाद खाली होने वाली सीटों पर उपचुनाव होंगे, जिन्हें जीतकर एनडीए उच्च सदन में अपनी सदस्य संख्या को 154 तक पहुंचा सकता है। यह संख्या दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े से महज नौ सीट कम होगी। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में टीएमसी के कुछ और राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे हो सकते हैं, जिससे एनडीए का आंकड़ा 163 तक पहुंच सकता है। यदि ऐसा होता है, तो सरकार को सभी महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन विधेयकों को बिना किसी अड़चन के पास कराने के लिए जरूरी संख्या बल मिल जाएगा। दूसरी तरफ, विपक्षी इंडिया गठबंधन के पास वर्तमान में 64 सांसद बचे हैं, क्योंकि आठ सांसदों वाली डीएमके और तीन सांसदों वाली आम आदमी पार्टी (आप) ने इस समूह से दूरी बना ली है। वहीं वाईएसआर कांग्रेस (7 सीटें) और बीजद (6 सीटें) किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं और वे मुद्दे के आधार पर फैसला ले सकते हैं।
तो…एनडीए की हो जाएंगी 313 सीटें
लोकसभा की बात करें तो वहां भी टीएमसी में मची आंतरिक कलह के कारण एनडीए की ताकत 313 सांसदों तक बढ़ सकती है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस को एक बड़ा झटका देते हुए पार्टी के 20 लोकसभा सदस्यों ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी में अपने आधिकारिक विलय की घोषणा कर दी है। इस बागी गुट ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर सदन में अलग बैठने की अनुमति के लिए एक औपचारिक अनुरोध-पत्र भी सौंप दिया है। बागी खेमे की प्रमुख नेता काकोली घोष दस्तीदार ने स्पष्ट किया कि लोकसभा अध्यक्ष से मिलने वाले इस समूह में 20 सदस्य शामिल हैं, जो कि सदन में टीएमसी के कुल सदस्यों की संख्या का दो-तिहाई से अधिक है। बागी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि उन्होंने एक मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय दल के साथ विलय किया है और असली तृणमूल कांग्रेस कौन है, इसका फैसला अब अदालत की चौखट पर ही तय होगा। इस टूट से पहले टीएमसी 28 सांसदों के साथ लोकसभा में कांग्रेस और सपा के बाद तीसरा सबसे बड़ा विपक्षी दल था।
यूपी की 10 राज्यसभा सीटो हो रहीं खाली
हालांकि, साल के अंत तक यानी नवंबर महीने में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के 10 सांसदों का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है। यूपी विधानसभा में इस समय समाजवादी पार्टी के पास बेहतर संख्या बल है, जिसके कारण राज्यसभा में सपा की सीटें बढ़ सकती हैं और इससे सत्ताधारी गठबंधन की ताकत थोड़ी प्रभावित हो सकती है। फिलहाल, लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत (363 सीटें) पाने से एनडीए अभी भी दूर है, लेकिन राज्यसभा में वह एक बेहद मजबूत स्थिति में कदम रखने जा रहा है।


