रांची। झारखंड में प्रस्तावित नगर निकाय चुनावों के लिए उम्मीदवारों के नियम तय हो गए हैं। अब कोई भी पात्र व्यक्ति एक साथ दो पदों के लिए चुनाव लड़ सकेगा। यानी वह वार्ड सदस्य के साथ महापौर या अध्यक्ष के लिए भी मैदान में उतर सकता है। नगर निगम क्षेत्रों में उम्मीदवार वार्ड सदस्य और महापौर दोनों पदों पर नामांकन कर सकता है। इसी तरह नगर परिषद व नगर पंचायत के लिए वार्ड सदस्य के साथ अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने की अनुमति होगी।
एक से अधिक वार्ड से चुनाव पर रोक
झारखंड नगरपालिका निर्वाचन एवं चुनाव याचिका नियमावली, 2012 के नियम 18(2)(ख) के तहत यह स्पष्ट है कि कोई भी उम्मीदवार एक से अधिक वार्डों से चुनाव नहीं लड़ सकता। यानी एक ही नगर निकाय में दो अलग-अलग वार्डों से वार्ड सदस्य के रूप में चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं है। नियमों के अनुसार कोई भी पात्र व्यक्ति उसी निकाय के किसी भी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ सकता है, लेकिन इसके लिए उसका नाम संबंधित नगरपालिका की मतदाता सूची में दर्ज होना चाहिए और वह चुनाव लड़ने योग्य होना चाहिए
अधिकतम दो नामांकन दाखिल होगा
प्रत्येक अभ्यर्थी अधिक से अधिक दो नामांकन पत्र दाखिल कर सकता है। नामांकन सुबह 11 बजे से दोपहर तीन बजे तक होगा। चुनाव आयोग सबका हिसाब रहेगा। उम्मीदवारों द्वारा दाखिल किए जानेवाले नामांकन पत्र, प्रस्तावकों द्वारा भरे जानेवाले प्रपत्र, प्रत्येक दिन के नामांकन के बाद आयोग को भेजे जानेवाले प्रपत्र, समेकित नामांकन पत्र आदि का फारमेट तैयार कर जिलों को भेज दिया गया है। उसकी जानकारी निर्वाची पदाधिकारियों को भी दे दी गई है।
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झारखंड में जल्द होगी नगर निकाय चुनाव की घोषणा, गैर-दलीय मुकाबले में दलों की प्रतिष्ठा दांव पर
रांची: झारखंड में नगर निकाय चुनाव की घोषण 27 जनवरी को होने की संभावना है। निवार्चन आयोग अपनी तैयारियों में जुटा है। वहीं, प्रत्याशी में अपनी ओर से तैयारी कर रहे हैं। जबकि राजनीति पार्टियां भी कार्यकर्ताओं से नगर निकाय चुनाव की तैयारी में जुटने का आह्वान कर चुकी है। इस बार का चुनाव भले ही गैर-दलीय आधार पर हो, लेकिन राजनीतिक तौर पर इसका असर बेहद व्यापक माना जा रहा है। शहरी वोट बैंक पर मजबूत पकड़ कायम कर चुकी बीजेपी के लिए यह चुनाव किसी चुनौती से कम नहीं है। वहीं सत्ता पक्ष जेएमएम, कांग्रेस और राजद पिछले विधानसभा चुनाव में शहरी क्षेत्रों में बढ़े जनसमर्थन से उत्साहित है और अपनी स्थिति को कायम रखने के लिए मैदान में पूरी ताकत के साथ उतरने की तैयारी कर चुका है। चुनाव गैर-दलीय होने के बाद भी महापौर, नगर परिषद और नगर पंचायत अध्यक्ष जैसे पदों पर सभी दलों की अप्रत्यक्ष भागीदारी साफ दिख रही है।
बैलेट पेपर से मतदान ने बदला समीकरण
पिछले चुनाव में रांची, जमशेदपुर, धनबाद, हजारीबाग और बोकारो जैसे प्रमुख शहरी निकायों में अपनी जीत दर्ज कराने वाली बीजेपी को इस बार बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाने का फैसला अखर रहा है। पार्टी का मानना है कि ईवीएम की बजाय बैलेट मतदान से सत्तापक्ष के लिए मैदान खोल सकता है, वहीं विपक्ष को संभलकर रणनीति बनानी होगी। वहीं, महापौर सीट के लिए सबसे ज्यादा दावेदार बीजेपी में है। रांची महापौर पद पर सबसे ज्यादा हलचल बीजेपी के भीतर है। संभावित दावेदारों में प्रमुख नामों में अशोक बड़ाईक, रोशनी खलखो, सुजाता कच्छप, नकुल तिर्की और राम कुमार पाहन शामिल हैं। दूसरी ओर जेएमएम से अजय तिर्की और कांग्रेस से रमा खलखो भी मैदान में उतरने को तैयार हैं। आजसू, राजद और वाम दलों में भी कमोबेश यही स्थिति है।
सता पक्ष की तैयारी जोरशोर से
शहरी इलाकों में बढ़ती राजनीतिक सक्रियता के साथ सत्ता पक्ष दल जेएमएम, कांग्रेस और राजद ने पार्टी स्तर पर तैयारी तेज कर दी है। पिछले चुनावों में मिले समर्थन ने उनका भरोसा और बढ़ाया है। हाल में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बैठक कर कार्याकर्ताओं को चुनाव की तैयारी में लग जाने की बात कह चुके है। जदयू की ओर भी नामों की सूची तैयार करने को कहा गया है। कांग्रेस और भाजपा खेमे में भी लोग चुनावी मोड में आ चुके हैं।
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नगर निकाय चुनाव शांतिपूर्ण कराने को आयोग ने कसी कमर, पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी
रांची: नगर निकाय चुनाव को लेकर शुक्रवार को रांची के रातू रोड स्थित आयोग कार्यालय में निर्वाची पदाधिकारियों (आरओ) और सहायक निर्वाची पदाधिकारियों (एआरओ) प्रशिक्षण सह बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता करते हुए राज्य निर्वाचन आयुक्त अलका तिवारी ने नगर निकाय चुनाव को स्वच्छ, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण बनाने के लिए निर्वाची पदाधिकारियों (आरओ) और सहायक निर्वाची पदाधिकारियों (एआरओ) को कड़ी जिम्मेदारियां सौंपी हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि चुनाव प्रक्रिया में दोनों पदाधिकारियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। किसी प्रकार की गड़बड़ी, विवाद या दबाव की स्थिति न बने, इसके लिए आयोग के नियमों और दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन अनिवार्य है। अलका तिवारी ने अधिकारियों से आयोग द्वारा जारी निर्वाचन पुस्तिका का गहन अध्ययन करने को कहा। छोटी-छोटी गलतियों और प्रक्रियागत चूक से विवाद बढ़ सकते हैं, इसलिए पुस्तिका ही निकाय चुनाव संचालन की प्रमुख मार्गदर्शिका है।
मतदान और मतगणना की बारीकियों का मिला प्रशिक्षण
बैठक में पदाधिकारियों को पूरे चुनावी प्रक्रिया एवं नामांकन से लेकर मतदान और मतगणना तक की बारीकियों के बारे में बताया गया। अलका तिवारी ने कहा कि इस बार बैलेट पेपर से मतदान कराया जाना है, इसलिए मतगणना के दौरान अत्यधिक सतर्कता जरूरी होगी। शांतिपूर्ण चुनाव के लिए प्रशासनिक तंत्र को हर स्तर पर तैयार रहने की जरूरत है।
आदर्श आचार संहिता के पालन पर सख्ती
निर्वाचन आयुक्त ने बताया कि अधिसूचना जारी होते ही आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी। इसके पालन को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी आरओ और एआरओ पर ही होगी। उन्होंने अधिकारियों से किसी भी विवाद से दूर रहने और निष्पक्ष भूमिका निभाने की सलाह दी। आयुक्त ने उम्मीदवारों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई तथा मीडिया रिपोर्टों की जांच कर आवश्यक कदम उठाने का निर्देश भी दिया। आवश्यकता पड़ने पर अधिकारियों से आगे की बैठकें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से की जा सकेंगी। बैठक में आयोग के सचिव राधेश्याम प्रसाद व अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।


