नई दिल्ली । शोधकर्ता वैज्ञानिक अब यह जान चुके हैं कि पृथ्वी के मेंटल से सोना कैसे निकलकर पृथ्वी की सतह तक पहुंचा। अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की टीम ने इस रहस्य का पर्दाफाश करने के लिए एक जटिल अध्ययन किया है। वैज्ञानिकों ने यह पता लगाया कि सोना पृथ्वी के गहरे मेंटल से ऊपर की सतह तक कैसे पहुंचा।
यह प्रक्रिया सल्फर यानी गंधक के साथ सोने की प्रतिक्रिया से जुड़ी है। इससे पहले वैज्ञानिक यह समझने में नाकाम रहे थे कि सोना पृथ्वी के भीतर कैसे संचालित होता है। अब वे यह जानने में कामयाब हो गए हैं कि पृथ्वी पर सोना करोड़ों साल पहले आ चुका था और विभिन्न प्रक्रियाओं के बाद यह मेंटल में समा गया था। इस शोध का मुख्य पहलू यह था कि सोना और सल्फर के बीच प्रतिक्रिया के बाद सोना गोल्ड ट्राइसल्फर कॉम्पलेक्स नामक एक जटिल रूप में बदल जाता है।
यह रूप अस्थिर होता है और एक बार यह बदलने के बाद सोना मैग्मा के साथ पृथ्वी की सतह की ओर बढ़ने लगता है। हालांकि, यह प्रक्रिया किसी भी स्थान पर नहीं हो सकती, इसके लिए खास परिस्थितियां आवश्यक होती हैं। वैज्ञानिकों ने यह पाया कि यह प्रक्रिया तब संभव होती है जब एक टेक्टोनिक प्लेट दूसरी प्लेट के नीचे घुसने की कोशिश करती है, जिसे सबडक्शन जोन कहा जाता है। वैज्ञानिकों ने न्यूमेरिकल मॉडलिंग का उपयोग किया और पाया कि गोल्ड ट्राइसल्फर कॉम्पलेक्स की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसके बाद सोना मैग्मा के साथ पृथ्वी की सतह तक पहुंचता है।
इस प्रक्रिया के दौरान, तापमान और दबाव की सही स्थितियां जरूरी होती हैं। इस अध्ययन के माध्यम से यह भी समझ में आया कि क्यों कुछ क्षेत्रों में खनिजों के पास सोने की मात्रा अधिक पाई जाती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां सबडक्शन जोन होते हैं। यह शोध इस बात का प्रमाण है कि पृथ्वी पर सोना पहुंचने के लिए एक लंबी और जटिल प्रक्रिया की आवश्यकता होती है, जो अब तक पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाई थी। मालूम हो कि पृथ्वी पर मौजूद सोने का रहस्य आखिरकार सुलझ गया है। अब तक यह माना जाता था कि पृथ्वी पर सोना क्षुद्रग्रहों के माध्यम से आया था, जैसा कि कई अध्ययन दावा करते थे। लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इसका जवाब ढूंढ लिया है।
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