हैदराबाद । भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अनुसार, आगामी स्पैडेक्स मिशन 30 दिसंबर को श्रीहरिकोटा से पीएसएलवी-सी60 नामक रॉकेट से लांच करेगा है। इस मिशन का उद्देश्य ऐसी तकनीक विकसित करना और प्रदर्शित करना है जो अंतरिक्ष में रहते हुए अंतरिक्ष यान को जोड़ने और अलग करने की अनुमति देती है।
पीएसएलवी-सी60 रॉकेट तैयार है और इस अंतिम तैयारियों और उपग्रह एकीकरण के लिए लांच साइट पर ले जाया गया है। इसरो ने एक तेज टाइम-लैप्स वीडियो साझा किया है जिसमें पहली बार लांच पैड पर ले जाए जा रहे पूर्ण रॉकेट को दिखाया गया है। लांच को लाइव देखने में रुचि रखने वालों के लिए, इसरो ने एक व्यूइंग गैलरी तैयार की है। आगंतुकों के लिए पंजीकरण 18 दिसंबर को शाम 6 बजे शुरू हुआ।
स्पैडेक्स मिशन को एक नई और लागत प्रभावी तकनीक का परीक्षण करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, इसमें अंतरिक्ष में एक साथ काम करने वाले दो छोटे अंतरिक्ष यान शामिल हैं। यह तकनीक भारत की भविष्य की अंतरिक्ष योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है, जिसमें चंद्रमा पर मिशन और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का निर्माण शामिल है।
आसान तरीके से समझने पर जब एक ही मिशन के लिए कई लांच की आवश्यकता होती है, तब अंतरिक्ष में डॉकिंग तकनीक महत्वपूर्ण होती है। इस मिशन के साथ, भारत यह क्षमता हासिल करने वाला दुनिया का चौथा देश बनने की रह पर है।
स्पैडेक्स मिशन में दो छोटे अंतरिक्ष यान शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक का वजन करीब 220 किलोग्राम है, जिन्हें पृथ्वी से करीब 470 किलोमीटर ऊपर एक गोलाकार कक्षा में एक साथ लांच किया जाएगा। मिशन यह परीक्षण करता है कि ये अंतरिक्ष यान कक्षा में रहते हुए कैसे मिल सकते हैं, डॉक कर सकते हैं और फिर अलग हो सकते हैं। कुल मिलाकर, स्पैडेक्स मिशन अंतरिक्ष अन्वेषण में भारत की महत्वाकांक्षाओं के लिए एक रोमांचक कदम है।
WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉
Join Now


