शादी सीजन होने और गिरती कीमतों के बाद भी घट रही खरीदारी
नई दिल्ली । कुछ दिनों पहले सोने की कीमत आसमान छू रही थी, लेकिन जब से ईरान के साथ इजराइल-अमेरिका युद्ध शुरू हुआ है तो इसकी कीमतों पर भी दबाव पड़ा है। अब सोने की कीमत पहले के मुकाबले नीचे आ गई हैं। ऊपर से शादियों का सीजन भी चल रहा है। फिर भी देश में सोने की खरीदारी बढ़ने के बजाय घट रही है। ज्वैलर्स एसोसिएशन ने कहा है कि ईरान संकट ने देश के लोगों की मानसिकता और जरूरतों को बदल दिया है, जिसका असर सोने के बाजार पर दिख रहा है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एसोसिएशन के सचिव ने बताया कि देश में सोने की बिक्री पिछले कुछ समय से लगातार कम हो रही है। देश के ज्यादातर लोगों में अब सोने की ओर रुझान कम होता दिख रहा है। इसके बजाय वे अपना कैश ईंधन, गैस और अन्य जरूरी सामानों की खरीद के लिए बचाकर रखना चाहते हैं, क्योंकि ईरान में चले रहे युद्ध की वजह से उनके अंदर आने वाले समय में महंगाई बढ़ने का डर सता रहा है। यही वजह है कि खुदरा हाजिर बाजार में सोने की बिक्री लगातार कम होती जा रही है।
ईरान संकट जब शुरू हुआ था, उससे पहले 27 फरवरी को सोने की कीमत 1,59,097 रुपए प्रति 10 ग्राम के आसपास थी। इसके बाद सोने की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया और 2 मार्च को युद्ध शुरू होने के समय 5.5 फीसदी बढ़कर 1,67,471 रुपए प्रति 10 ग्राम पहुंच गई थी। हालांकि, अब एक बार फिर कीमतों पर दबाव पड़ा है और यह गिरकर फिलहाल 1,58,399 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि यह हैरान करता है कि सोने की कीमतों में गिरावट के बावजूद इसकी खरीदारी घट रही है।
एसोसिएशन सचिव ने बताया कि देश में ज्वैलरी की बिक्री भी कम होती जा रही है, क्योंकि एक तो मार्च का महीना होने की वजह से दस्तावेजीकरण बढ़ गया है और दूसरा ईरान संकट ने खुदरा खरीदारों की मंशा को भी बदल दिया है। अब उनका जोर गहनों के बजाय जरूरी सामानों की तरफ ज्यादा दिख रहा है। ज्वैलर्स भी नया सामान खरीदने के बजाय वित्तवर्ष का आखिरी महीना होने की वजह से अपने बहिखातों को दुरूस्त करने में लगे हैं। ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड का भाव 106 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है, जिसके जल्द ही 120 डॉलर तक जाने की आशंका जताई जा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक कमोडिटी की खरीद-बिक्री डॉलर में होती है और ऐसे समय में डॉलर मजबूत हो रहा है तो सोने पर इसका दबाव साफ देखा जा रहा और निवेशक इस समय कीमती धातुओं की ओर आकर्षित होने के बजाय डॉलर पर दांव लगा रहे हैं। इसके अलावा केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरें भी इस माहौल में ऊपर ही बनी रहेंगी, ताकि महंगाई को काबू में रखा जा सके। ज्यादा ब्याज दर की वजह से भी सोने और चांदी की मांग पर असर पड़ता है। हालांकि, विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले समय में यह दोबारा 5,200 डॉलर यानी 1.64 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के आसपास जा सकता है।


