नई दिल्ली। मई की रात भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की आहट विश्व मंच तक पहुंच गई। सूत्रों के मुताबिक भारत के ऑपरेशन सिंदूर के जवाब में पाकिस्तान ने ‘ऑपरेशन बनयान अल-मरसूस’ नामक सैन्य कार्रवाई की शुरुआत की, लेकिन यह महज आठ घंटे में ही धराशायी हो गई। जवाबी कार्रवाई में भारत की वायुसेना ने पाकिस्तान के कई अहम सैन्य ठिकानों को तबाही कर दिया। रातोंरात भारतीय राफेल विमानों से मिसाइलें और एसयू-30 एमकेआई विमानों से ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलें दागी गईं। हमलों में चकलाल में नूर खान एयरबेस, जैकोबाबाद और भोलारी एयरबेस को भारी नुकसान पहुंचा। नूर खान एयरबेस, पाकिस्तान की उत्तरी एयर कमांड के कमांड-कंट्रोल नेटवर्क का हिस्सा था और पहले ही हमले में ध्वस्त हो गया।
मीडिया रिपोर्ट में वायुसेना के पास मौजूद सबूतों के मुताबिक इन हमलों में पाकिस्तान के एक सी-130जे ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, एक जेएफ-17, और दो एफ-16 फाइटर जेट्स को मार गिराया गया। भारतीय एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम, जो आदमपुर एयरबेस पर तैनात था, उसने इस ऑपरेशन में 11 बार दुश्मन के विमानों को रोका। इसने 315 किमी दूर पाकिस्तान की सीमा में उड़ रहे साब-2000 एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम को भी निशाना बनाकर गिरा दिया।
10 मई को भारत ने लाहौर में तैनात चीनी एलवॉय-80 एयर डिफेंस सिस्टम को हारपेज कामिकेज़ ड्रोन से तबाह कर दिया। इसके अलावा करांची के मलीर इलाके में तैनात एयक्यू-9 को भी भारत की मिसाइल ने नष्ट कर दिया। पाकिस्तान ने 10 मई को अपने ऑपरेशन की शुरुआत की थी और दावा किया था कि वह 48 घंटे में भारत के एयरबेस तबाह कर देगा, लेकिन भारतीय सेना के सटीक और तीव्र प्रहार से पाकिस्तान की योजना पस्त पढ़ गई। स्थिति जब हाथ से निकलने लगी तो पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारत से सीजफायर की अपील की।
सूत्रों के मुताबिक भारतीय नौसेना करांची बंदरगाह पर हमले के लिए तैयार थी और उसका बेड़ा मकरान तट से महज 260 मील दूर था। पाकिस्तान ने चेतावनी दी, लेकिन भारत पीछे नहीं हटा। दोपहर तक पाकिस्तान ने युद्धविराम की आधिकारिक गुहार लगाई। इससे पहले 7 मई को भारत ने पाकिस्तान में 9 आतंकवादी ठिकानों को तबाह कर दिया था। मुरिदके और बहावलपुर में मौजूद आतंकी ठिकानों पर मिसाइलों से हमला कर उन्हें पूरी तरह तबाह कर दिया।
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