दुमका : रूपालक्ष्य एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के बैनर तले अनुपल साउ की प्रस्तुति और आबीर राय के निर्देशन में बनी “हूल” नामक बांग्ला फिल्म जल्द ही रिलीज़ होने जा रही है। यह फिल्म 1855 के संथाल विद्रोह के इतिहास को 170 साल बाद पहली बार बड़े पर्दे पर लाने जा रही है। 30 जून को हुल दिवस के मौके पर इस फिल्म का पोस्टर विमोचित किया गया, रूपालक्ष्य की ओर से। “हूल” एक संथाली शब्द है, जिसका अर्थ होता है आंदोलन। 1855 में वर्तमान संथाल परगना, जो उस समय बीरभूम के पश्चिमी क्षेत्र जंगली महल का हिस्सा था, वहाँ यह विद्रोह हुआ था।
उस समय इस क्षेत्र में साहूकारी शोषण, ज़मीन का लगान अत्यधिक बढ़ना, और रेलवे लाइन बिछाने के काम में लगे अंग्रेज ठेकेदारों द्वारा संथाल महिलाओं पर हो रहे शारीरिक अत्याचारों के विरोध में यह आंदोलन शुरू हुआ। उस समय कोलकाता देश की राजधानी थी और वायसराय (बड़ा लाट) देश का सर्वोच्च अधिकारी। विद्रोहियों ने साहेबगंज ज़िले के वर्तमान भोगनाडीही गाँव से पैदल ही कोलकाता जाकर वायसराय से अपनी शिकायत करने की योजना बनाई थी। उन्हें यह भी नहीं पता था कि भोगनाडीही से कोलकाता की दूरी कितनी है और पैदल चलकर वहाँ पहुंचने में कितना समय लगेगा। यह आंदोलन सिउड़ी के पास जाकर एक दर्दनाक अंत को प्राप्त हुआ। लेकिन 170 सालों में भी यह आंदोलन इतिहास में उचित स्थान नहीं पा सका। यह पहली बार है जब “हूल” को एक बांग्ला फिल्म के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। इस फिल्म की शूटिंग दुमका ज़िले के घने जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में की गई है।


