नई दिल्ली । देवभूमि उत्तराखंड के गढ़वाल के प्रवेश द्वार माने जाने वाले कोटद्वार में, खोह नदी के सुरम्य तट पर श्री सिद्धबली मंदिर स्थित है। भगवान श्री राम के परमभक्त हनुमान को समर्पित यह मंदिर अत्यंत प्राचीन और प्रतिष्ठित सिद्धपीठ है। हाल ही में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मंदिर को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विशेष पोस्ट साझा किया। उन्होंने मंदिर का वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा कि पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार में स्थित सिद्धबली मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है, जो विशेष रूप से हनुमान जयंती और अन्य धार्मिक आयोजनों के अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।
मंदिर को लेकर गहरी मान्यता है कि यहां सच्चे मन से आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, और बाबा के दरबार से कोई भी भक्त निराश होकर नहीं लौटता। यहां नारियल चढ़ाने और नारियल तोड़ने की एक विशेष परंपरा है, जो भक्तों की अटूट श्रद्धा का प्रतीक है। मंदिर के चारों ओर फैली हरी-भरी पहाड़ियों की श्रृंखलाएं और शांत प्राकृतिक वातावरण भक्तों को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है। स्थानीय मान्यताओं और पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी पवित्र स्थान पर नाथ संप्रदाय के महान गुरु, गुरु गोरखनाथ और भगवान हनुमान जी महाराज के बीच भेंट तथा साधना से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंग का उल्लेख मिलता है।
कहा जाता है कि गुरु गोरखनाथ ने अपने शिष्यों और अनुयायियों के साथ इस स्थल पर लंबे समय तक कठोर तपस्या की थी। उनकी इस साधना से प्रसन्न होकर भगवान हनुमान ने उन्हें यहीं साक्षात दर्शन दिए थे। इसी कारण इस स्थान का नाम सिद्धबली पड़ा, जहां सिद्ध का अर्थ तपस्या से पूर्ण और बली का अर्थ बलशाली हनुमान जी से है। मंदिर के गर्भ गृह में भगवान हनुमान की मूर्ति स्थापित होने से भी पहले से यहां प्राचीन सिद्ध पिंडियां विद्यमान हैं, जिनकी पूजा यहां प्रमुख रूप से की जाती है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। यह मंदिर अपनी आध्यात्मिक चेतना और मनोहारी प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है।
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