नई दिल्ली । भारत की राजनीति में आने वाले वर्षों में एक बड़ा जनसांख्यिकीय बदलाव देखने को मिल सकता है। 2029 के लोकसभा चुनाव तक ‘जेनरेशन जेड’ यानी ‘जेन जी’ देश की सबसे बड़ी वयस्क पीढ़ी बन सकती है। यह वह वर्ग होगा, जिसकी उम्र लगभग 18 से 32 वर्ष के बीच होगी और जो चुनावी राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाने की स्थिति में पहुंच जाएगा।
इस पीढ़ी की सबसे बड़ी ताकत इसकी संख्या के साथ-साथ डिजिटल सक्रियता है। जेन जी सामाजिक माध्यमों पर बेहद सक्रिय है और रोजगार, शिक्षा, महंगाई, डिजिटल सुविधाओं, पारदर्शिता तथा जलवायु जैसे मुद्दों को लेकर अपनी राय खुलकर रखती है। ऐसे में राजनीतिक दलों के लिए केवल पारंपरिक जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों के आधार पर चुनावी रणनीति बनाना पर्याप्त नहीं होगा।
हाल के दिनों में युवाओं से जुड़े आंदोलनों ने भी इस बदलती राजनीतिक ताकत की झलक दिखाई है। परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर युवाओं के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस को प्रभावित किया। जेन जी का प्रभाव खासतौर पर हिंदी पट्टी के राज्यों में महत्वपूर्ण हो सकता है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान जैसे राज्यों में युवा मतदाताओं की बड़ी संख्या चुनावी नतीजों पर असर डाल सकती है।
ऐसे में 2029 का लोकसभा चुनाव सिर्फ पार्टियों के बीच मुकाबला नहीं होगा, बल्कि युवाओं के मुद्दों और उनकी अपेक्षाओं को समझने की भी परीक्षा होगी। रोजगार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और बेहतर अवसर देने वाली पार्टी को इस नए वोटबैंक का समर्थन हासिल करने में बढ़त मिल सकती है।
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