नई दिल्ली । गर्मियों के दिनों में दाल, सब्जी, चावल और रोटी जैसी चीजों को फ्रीज में रखकर कई घंटों बाद या अगले दिन तक इस्तेमाल करना आम बात हो गई है। गर्मियों के दिनों में यह भोजन सेहत के लिए नुकसान दायक हो सकता है। हालांकि आधुनिक विज्ञान सीमित समय तक भोजन को सुरक्षित रखने की बात करता है, लेकिन आयुर्वेद में सदियों पहले से ताजा भोजन को ही स्वास्थ्य के लिए सबसे बेहतर माना गया है। विशेषज्ञों के अनुसार पका हुआ भोजन ज्यादा देर तक रखने पर उसमें बैक्टीरिया पनपने लगते हैं, जो गर्मियों में कई बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट भी बताती है कि ताजा पका भोजन तुरंत खाना सबसे सुरक्षित और स्वस्थ आदत है। रिपोर्ट के मुताबिक भोजन पकाने के दौरान उसमें मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं, लेकिन जब खाने को लंबे समय तक 5 डिग्री से 60 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच रखा जाता है तो उसमें दोबारा बैक्टीरिया तेजी से बढ़ने लगते हैं। ऐसे भोजन का सेवन फूड पॉइजनिंग और अन्य फूडबॉर्न बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है। गर्मियों में यह जोखिम और अधिक बढ़ जाता है क्योंकि ऊंचा तापमान बैक्टीरिया की वृद्धि को तेज कर देता है। आयुर्वेद के अनुसार बासी भोजन शरीर के वात, पित्त और कफ दोषों का संतुलन बिगाड़ सकता है। इन दोषों में असंतुलन होने पर पाचन संबंधी परेशानियां, गैस, एसिडिटी और भारीपन जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
आयुर्वेद में भोजन को पकने के एक से तीन घंटे के भीतर खाने की सलाह दी गई है। इसके बाद भोजन की ताजगी और पोषण दोनों कम होने लगते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भोजन को बार-बार गर्म करने से उसके पोषक तत्व भी धीरे-धीरे नष्ट होने लगते हैं। कई जरूरी विटामिन और न्यूट्रिएंट्स गर्मी और हवा के संपर्क में आने पर अपनी गुणवत्ता खो देते हैं। इससे भोजन की पौष्टिकता कम हो जाती है और शरीर को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। साइंस और आयुर्वेद दोनों इस बात पर सहमत हैं कि ताजा पका भोजन शरीर के लिए ज्यादा सुरक्षित और पौष्टिक होता है।


