नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और तनाव के कारण भारत में रसोई गैस (एलपीजी)की आपूर्ति पर खतरा पैदा हो गया है। खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण गैस से भरे कई जहाज स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के पास फंस गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मार्च में आने वाले एलपीजी जहाज जल्द भारत के लिए रवाना नहीं होते हैं, तो देश में रसोई गैस की गंभीर कमी हो सकती है। इसका सीधा असर करोड़ों परिवारों पर पड़ सकता है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी खरीदार है और अपनी 90 प्रतिशत से अधिक जरूरतें पश्चिम एशिया से पूरी करता है।
हाल के वर्षों में भारत ने अमेरिका से भी लंबी अवधि का समझौता किया है, लेकिन वहां से आने वाली मात्रा अभी कम है और भाड़ा अधिक है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर अभी अमेरिका से एलपीजी खरीदी भी जाए, तो वह अप्रैल से पहले भारत नहीं पहुंच पाएगी। बाजार विश्लेष्कों के अनुसार भारत के पास एलपीजी के लिए अन्य सप्लायर खोजने के विकल्प सीमित हैं। कुछ अतिरिक्त गैस अमेरिका, रूस या अर्जेंटीना से मिल सकती है, लेकिन मात्रा कम होगी और यह वैश्विक कीमतों और जहाजों की उपलब्धता पर निर्भर करेगा। सरकारी अधिकारियों के अनुसार भारत के पास फिलहाल एलपीजी का लगभग 30 दिनों का भंडार मौजूद है।
यदि खाड़ी क्षेत्र में तनाव लंबे समय तक बना रहा, तो सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है। भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने सरकार के साथ आपात योजना पर चर्चा की है। देश की सबसे बड़ी एलएनजी आयातक कंपनी पेट्रोनेट एलएनजी ने कतर से आने वाली गैस पर फोर्स मेजर घोषित किया है, जिससे ग्राहकों को मिलने वाली गैस में करीब 50 प्रतिशत कटौती हुई है। तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का स्टॉक लगभग आठ हफ्तों का है, इसलिए तेल की तत्काल कमी की संभावना कम है। हालांकि, अगर समुद्री मार्ग लंबी अवधि तक बंद रहे, तो तेल सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है।


